बोहरानों (संकट)के शिकार पाकिस्तानी फिर फ़ौजी दौर याद करने लगे: अमरीकी अख़बार

अमरीकी अख़बार वाशिंगटन पोस्ट का कहना है पाकिस्तान में सियासी और इक़तिसादी बोहरानों(संकट) ने फिर फ़ौजी हुक्मरानी की पुरानी यादों को ताज़ा कर दिया और अक्सर इस हुकूमत से नालां लोग जमहूरीयत से मायूस नज़र आते हैं ,और फ़ौज की राहों को देखते हैं।

अख़बार ने कुछ मायूस पाकिस्तानीयों के तास्सुरात ब्यान करते हुए लिखा कि जमहूरीयत से उन्हें कुछ भी नहीं मिला है। जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के 9 साला दौर-ए-हकूमत को याद करते हुए लोग कहते हैं कि इन के दौर में रिश्तेदार ख़ुशहाल और इक़तिसादी तरक़्क़ी की शरह बेहतर थी, जनरल मुहम्मद ज़िया उल-हक़ का दौर भी मुसबत था।

फ़ौजी हुक्मरानी में अच्छे और बेहतर मुंतज़िम होते हैं। अख़बार के मुताबिक़ यक़ीनी तौर पर पाकिस्तान की 64 साला तारीख़ में फ़ौजी हुकूमत के लिए लोगों की ये ख़ाहिशात नई नहीं।

फ़ौज आम तौर पर अवामी हिमायत से ही तीन बार मार्शल ला लगा चुकी है। अदलिया जो पहले फ़ौजी हुकूमतों को आईनी जवाज़(कानीनी राह) फ़राहम क्या करती थी अब वो करप्शन से नबरद आज़मा है।