पटना 20 जून : उत्तराखंड में ज़मीं अन्जाल और सैलाब की कियामत में बिहार के कई लोग अभी भी फंसे हुए हैं। उन्हें इंतजार है किसी मसीहा का, जो उन्हें इस मुसीबत की घड़ी से बाहर निकाल सके। जेडी वीमेंस कॉलेज के पीछे रहनेवाले संजीव सुमन (तालीम महकमा में डिप्टी डायरेक्टर) अपनी बीवी और तीन दोस्तों और उनके अहले खाना के साथ वाकिया के दिन से ही केदारनाथ से नीचे उतरने के रास्ते में फंसे हैं। उनके साथ स्टेट बैंक के ऑडिट मैनेजर नरेंद्र सिंह, पंकज सिंह और स्टेट बैंक रांची में मैनेजर डीएस झा और उनका अहले खाना भी है।
बस जिंदा हैं, यही बड़ी बात है
संजीव सुमन ने बुध की सुबह प्रो श्रीकांत सिंह (पटना विवि में अदाद व शुमार के उस्ताद) को फोन पर आपबीती सुनायी। उनके मुताबिक संजीव ने बताया कि वे लोग केदार नाथ से फलसफा के बाद नीचे लौट रहे थे। 10-12 किलोमीटर का फासला तय कर चुके थे। गौरी कुंड से एक-डेढ़ किलोमीटर पहले अचानक मौसम खराब हुआ और आगे करीब 50-60 मीटर लंबाई तक सड़क ज़मीं बोस हो गयी।
इसमें कई लोग और गाड़ियां भी समा गयी। वह खौफनाक नजारा अभी भी आंखों के सामने नाच रहा है। कम से कम 20-25 लोग जमीं दोज़ हो गये। अभी तक वहां इमदाद काम शुरू नहीं हो सका है। कुछ खाने को भी नहीं मिल रहा है। तीन दिनों से कुछ खाया-पिया नहीं है। पास में जो कुछ खाने का सामान था, वह भी खत्म हो चुका है। मोबाइल की बैटरी भी खत्म हो चुकी है। अभी तक बचे रहे हैं, यही सबसे बड़ी बात है।
बिहार हुकूमत से मदद की फरियाद
पटना यूनिवर्सिटी में अदाद व शुमार के उस्ताद प्रो श्रीकांत सिंह ने केदार नाथ धाम में फंसे अपने दोस्तों व उनके अहले खाना को महफूज बाहर निकालने की शुरू करने की तलब रियासत हुकूमत से की है। उन्होंने बताया कि उनके दोस्तों की हालत लगातार खराब हो रही है, लेकिन वहां का मुकामी इंतेजामिया मदद के लिए आगे नहीं आया है।