मदीना मुनव्वरा 23 अप्रैल : ये बात जुनूबी हिंद बल्कि तमाम हिंदूस्तानी मुस्लमानों के लिए क़ाबिल फ़ख़र है कि मौलाना ख़्वाजा शरीफ़ शेख़ अलहदीस जामिआ निज़ामीया से बुख़ारी शरीफ़ और शमाइल तिरमिज़ी का दरस लेने की ग़रज़ से सऊदी अरब के मुख़्तलिफ़ मुक़ामात से अरब उल्मा की एक जमात रुजू हुई ।
मक्का मुकर्रमा से दरसका आग़ाज़ हुआ और मदीना मुनव्वर में इख़तताम अमल में आया । सिर्फ दो हफ़्तों के अंदर दो किताबों का तकमिला हुआ । फ़ज्र की नमाज़ के बाद से दरस का सिलसिला शुरू होता और रात में दस बजे ख़त्म हुआ । दरमयान में नमाज़ों और ख़वाइज ज़रुरीया के इलावा कोई दूसरी मिसरो फ़त्त ना होती । मदीना मुनव्वरा में लोग हैरान-ओ-शिशदर थे कि एक हिन्दी आलम से अरब उल्मा बुख़ारी शरीफ़ पढ़ रहे हैं ।
मौलाना दौरान दरस इलम-ओ-इर्फ़ान के ऐसे मोती बिखेर रहे थे कि उल्मा हैरान और मसरूर नज़र आ रहे थे । आप के चंद काबिल-ए-ज़िकर शागिर्दों के नाम ये हैं मंज़र बिन मुहम्मद मदीद वज़ारत अलशीओन अलासलामीह (मदीना मुनव्वरा ) मुहम्मद बिन अहमद हरीरी प्रोफ़ैसर मलिक अबदुल अज़ीज़ यूनीवर्सिटी (जद्दा ) नाइफ़ बिन हमद अबदुल्लाह बानी मुदर्रिसा हबीब बिन अदी (रियाज़ ) उम्र बिन इबराहीम बिन अबदुल्लाह अलतवीजरी अमीन अलमकतबा (अलक़सीम ) सालिहबिन अबदुल्लाह अलाशीमी मुदीर बुहूस वालदार मात अलासलामीह (रियाज़ )-ओ-मुदर्रिस मस्जिद नबवी शरीफ़ इन उल्मा ने मौलाना की बे इंतिहा-ए-तारीफ़ करते हुए कहा कि आप जामिआ निज़ामीया हिंद में मंबा नूराएं ।