अयोध्या विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से सीनियर वकील राजीव धवन ने दलील पेश की। उन्होंने कहा कि इस्लाम सामूहिकता वाला मजहब है।
सामूहिक नमाज मस्जिद में अदा की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और एसए नजीर की पीठ के सामने धवन ने कहा कि ‘मस्जिद कोई मजाक के लिए नहीं बनाई गई थी, हजारों लोग यहां नमाज अदा करते हैं।
मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को की जाएगी। इससे पहले 17 मई को मामले पर सुनवाई हुई थी। शीर्ष कोर्ट ने गर्मी छुट्टी के बाद सुनवाई करने को कहा था।
गौरतलब है कि 17 मई को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और एसए नजीर की पीठ ने इस पर सुनवाई की थी, जिसमें मुस्लिम पक्षकारों ने अपनी दलीलें पेश की थी और कहा कि 1994 के इस्माइल फारूकी फैसले में कहा गया है कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है और इसे दोबारा परीक्षण के लिए संवैधानिक पीठ को भेजा जाना चाहिए।
वहीं इस पर हिंदू पक्ष ने कहा कि वह मुद्दा जमीन अधिग्रहण के संबंध में था और मौजूदा मामला टाइटल विवाद का है। इस लिहाज से उस फैसले का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। इसलिए इस मामले को संवैधानिक पीठ में नहीं भेजा जाना चाहिए।