राज्य की भाजपा सरकार द्वारा मराठा समाज को आरक्षण देने का ऐलान किए जाने के बाद राज्य के मुस्लिम समाज ने भी आरक्षण की मांग तेज कर दी है। सोमवार को शुरू हुए राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन मुस्लिम विधायकों ने 2014 में कांग्रेस सरकार द्वार मुसलमानों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में दिया गया 5 प्रतिशत आरक्षण लौटाने की मांग भाजपा सरकार से की।

विधानसभा सत्र की शुरूआत होते ही विधान भवन परिसर में कांग्रेस और एमआईएम के मुस्लिम विधायकों ने आरक्षण की मांग के समर्थन में बैनर लहराए। बैनर लहराने वालों में कांग्रेस के अमीन पटेल, अब्दुल सत्तार, एमआईएम के वारिस पठान प्रमुख थे। इस मामले में कांग्रेस के विधायक और अल्पसंख्यक मामलों के पूर्व मंत्री मोहम्मद आरिफ नसीम खान ने कहा कि हम सरकार से नया आरक्षण नहीं मांग रहे।

कांग्रेस सरकार ने 2014 में मुसलमानों को विशेष पिछड़ा वर्ग के तहत 5 प्रतिशत आरक्षण दिया था। कांग्रेस सरकार द्वारा दिए गए इस आरक्षण को अदालत ने भी मान्यता दी है, लेकिन भाजपा सरकार के आने के बाद मुसलमानों को आरक्षण से वंचित कर दिया गया है।
नसीम खान ने कहा कि मुख्यमंत्री पिछले चार साल से मुस्लिम समाज से झूठ बोल रहे हैं कि मुसलमानों को कई सुविधाएं दी जा रही है। जबकि हकीकत यह है कि मुसलमानों को मौलाना आजाद महामंडल से पिछले चार साल में एक पैसे की सहायता नहीं मिली। मुस्लिम बच्चों को शिक्षा में कोई राहत नहीं मिली।
मुस्लिम आरक्षण की मांग को लेकर सोलापुर जिले से पैदल चलते हुए एक मोर्चा आजाद मैदान तक आया है और लोग धरने पर बैठ गए हैं। मोर्चे में एक 12 साल का बच्चा भी है। नसीम खान मे आजाद मैदान जाकर धरने पर बैठे लोगों से मुलाकात की। उनके साथ कांग्रेस के विधायक अमीन पटेल और नितेश राणे भी थे।
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आसिम आजमी ने विधानसभा में कहा कि अगर आज अटल जी होते तो वह मुख्यमंत्री को जरूर राजधर्म सिखाते। उन्होंने कहा कि राजधर्म तो यही है कि मराठों के साथ-साथ मुसलमानों को भी आरक्षण मिलना चाहिए, लेकिन फडणवीस सरकार जानबूझकर मुसलमानों के आरक्षण को रोके हुए है।
साभार- ‘नवभारत टाइम्स’