महिकमा अक़लियती बहबूद के बजट की इजराई में हुकूमत का रवैया मशकूक

तेलंगाना हुकूमत ने जारीये मालीयाती साल अक़लियती बहबूद के लिए 1105करोड़ रुपये का बजट मुख़तस किया है लेकिन पिछ्ले मालीयाती साल के तजुर्बा की बुनियाद पर जारीये साल मुकम्मिल बजट की इजराई की उम्मीद नहीं की जा सकती। महिकमा अक़लियती बहबूद का क़लमदान चीफ़ मिनिस्टर के चन्द्र शेखर राव‌ के पास है लेकिन पिछ्ले 10 माह के दौरान चीफ़ मिनिस्टर ने अक़लियती बहबूद से मुताल्लिक़ एक भी आला सतही जायज़ा मीटिंग तलब नहीं किया जिस के नतीजे में महिकमा फैइनेँस और दुसरे मुताल्लिक़ा मह्कमाजात के ओहदेदारों पर अक़लियती बहबूद की स्कीमात पर अमल आवरी के सिलसिले में कोई दबाव‌ नहीं है जिस के नतीजे में महिकमा अक़लियती बहबूद बेबस होचुका है।

मालीयाती साल 2015-16 के बजट की मंज़ूरी को 15 दिन गुज़र गए लेकिन जारीया साल के बजट से अभी तक एक रुपया भी जारी नहीं किया गया जबकि दुसरे मह्कमाजात के लिए बजट की इजराई का आग़ाज़ कर दिया है।

इस सिलसिले में जब कभी चीफ़ मिनिस्टर के दफ़्तर से नुमाइंदगी की जाती है तो उसे चीफ़ मिनिस्टर से रुजू नहीं किया जाता। अक़लियती बहबूद का क़लमदान अगरचे चीफ़ मिनिस्टर ने अपने पास रखा लेकिन किसी वज़ीर को मुताल्लिक़ा महिकमा की निगरानी की हिदायत भी नहीं दी।

डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर मुहम्मद महमूद अली ने अगरचे बाज़ मवाक़े पर अक़लियती बहबूद का जायज़ा मीटिंग मुनाक़िद किया लेकिन इस मीटिंग में किए गए फ़ैसलों को चीफ़ मिनिस्टर की मंज़ूरी हासिल नहीं होसकी जिस के बाइस ये मीटिंग भी बेफ़ैज़ साबित हुए। महिकमा अक़लियती बहबूद के ओहदेदारों का मानना हैके जब तक चीफ़ मिनिस्टर की सतह पर मीटिंग मुनाक़िद नहीं होगी उस वक़्त तक बजट की इजराई के सिलसिले में महिकमा पर दबाव‌ नहीं पड़ेगा। चीफ़ मिनिस्टर जो असेंबली और आम जलसों में अक़लियतों के हक़ में कई एलानात और तेकिनात देते रहे हैं लेकिन उन पर अमल आवरी के सिलसिले में अगर उसी क़दर संजीदगी का मुज़ाहरा किया जाये तो बेहतर होगा।