मिस्र फिर झगडों की राह पर

क़ाहिरा / मिस्र की सुप्रीम कोर्ट‌ ने हूसनी मुबारक को ओहदे से अलग‌ करने के बाद मुल्क में पहली मर्तबा होने वाले आज़ादाना और ग़ैर जांबदाराना चुनाव‌ के लिए बनाई गई पार्लीमेंट को कल गै़रक़ानूनी क़रार दे दिया, जिस के बाद एक बार फिर इक़तिदार पर फ़ौज की गिरिफ़त मज़बूत हो जाने का अंदेशा पैदा हो गया है।

सरकारी ख़बररसां एजेंसी मीणा ने बताया है कि सुप्रीमकोर्ट‌ ने कल अपने तफ़सीली फ़ैसले में कहा है कि पूरा इलैक्शन ही गै़रक़ानूनी था, इस लिए इस के बाद बनने वाली पार्लीमेंट भी गै़रक़ानूनी है।

कोर्ट‌ का फ़ैसला आने के बाद हुक्मराँ फ़ौजी कौंसल की अहम मीटिंग हुई, लेकिन इस की तरफ़ से कोई ब्यान जारी नहीं किया गया।
जिस से मीटिंग की तफ़सील नहीं मालूम होसकी। लेकिन‌ फ़ौजी सुत्रो का कहना है कि अदालत के इस फ़ैसले से फ़ौज को इंतिज़ामी इख़्तयारात मिलने का रास्ता साफ़ हो गया है।