मिस्र में राष्ट्रपती चुनाव कि आज से शुरुआत‌

* जमहूरीयत ख़तरे में, इख़वान उल मुस्लीमीन कि चैतावनी
क़ाहिरा / मिस्र के राष्ट्रपती चुनाव से पहले मिस्र में ताज़ा इंतिशार पैदा हो गया, जब कि इस्लाम पसंदों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले की सखत बुराई की, जिस में पार्लीमेंट के एवान-ए-ज़ेरीं को खत्म‌ करने की हिदायत दी गई है, जिस में इस्लाम पसंदों का ग़लबा है।

उन्हों ने चेतावनी दि कि सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से इन्क़िलाब से हासिल होने वाले फाइदों के खिलाफ‌ होसकता हैं, जब कि दो रोज़ा राष्ट्रपती चुनाव कि कल से शुरुआत‌ हो जाएगी। पाँच करोड़ मिस्री वोटर‌ मुल्क से अव्वलीन जमहूरी तौर पर तय किये जाने वाले सदर का चुनाव‌ करेंगे, जिस के लिए पुर्व प्रधानमंत्री अहमद शफ़ीक़ का इख़वान उल मुस्लीमीन के हिमायत याफ़ता उम्मीदवार मुहम्मद मर्सी से मुक़ाबला है।

सुप्रीम कोर्ट ने हुक्म जारी किया है कि हालिया पार्लीमेंट्री चुनाव‌ जिन काइदों के तहत किए गए थे, वो ख़ुद कारकर्द नही हैं, जिस की वजह से मक़बूल तय किये हुए पार्लीमैंट सदस्यों की आधि सीटें जिन पर इस्लाम पसंद तय‌ हुए हैं, गै़रक़ानूनी क़रार पाती हैं। अदालत ने इस क़ानून को भी रद‌ क़र दिया है, जिस के तहत अहमद शफ़ीक़ को राष्ट्रपतीचुनाव‌ में मुक़ाबला पर पाबंदी लगाई गई है।

इख़वान उल मुस्लीमीन ने चेतावनी दि कि मिस्र की कमज़ोर जमहूरी हुकूमत सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की वजह से ख़तरे में है।
और इन्क़िलाब से हासिल होने वाले फाइदों के खिलाफ‌ होसकते हैं और मुल्क को संगीन ख़तरा पेश‌ है। ये अब भी वाज़िह नहीं होसका कि मिस्र के अगले सदर के इख़्तयारात क्या होंगे?।

इस सिलसिले में हुकूमत की रहनुमाई करने के लिए कोई दस्तूर मौजूद नहीं है, लेकिन तय किया हुआ सदर वाज़िह तौर पर इतना ताक़तवर नहीं होंगा, जितना कि मिस्र के साबिक़ फ़ौजी हुक्मराँ रह चुके हैं।