मुतनाज़ा दस्तावेज़ी फ़िल्म पर पाबंदी गैर ज़रूरी

वाशिंगटन

वाशिंगटन में साबिक़ पुलिस ऑफीसर किरण बेदी का तास्सुर

साबिक़ पुलिस ओहदेदार और बी जे पी लीडर किरण बेदी ने कहा कि दिल्ली इस्मत रेज़ि वाक़िये पर बीबी सी की मुतनाज़ा दस्तावेज़ी फ़िल्म पर बगैर मुशाहिदा और तजज़िया के हुकूमत को पाबंदी आइद करने की चंदाँ ज़रूरत नहीं है जबकि ये फ़िल्म हिन्दुस्तानी समाज में जराइम की रोक थाम केलिए लायेहा-ए-अमल तय्यार करने में कारआमद साबित होसकती है।

दिल्ली इजतेमाई इस्मत रेज़ि केस 2012 पर दुख़तर हिंद के नाम से बनाई गई दस्तावेज़ी फ़िल्म इस हफ़्ते अमरीका में दिखाई गई है लेकिन हिन्दुस्तानी हुकूमत ने इस पर इमतिना आइद करदिया है। किरण बेदी ने एक इंटरव्यू में कहा कि ये फ़िल्म हिन्दुस्तानी समाज में ग़लत ज़हनियत की अक्कासी करती है जो कि शहरों और देहातों में पाई जाती है।

साबिक़ आई पी एस ऑफीसर जो कि इन दिनों अमरीका के दौरे पर हैं और यहां मुतनाज़ा दस्तावेज़ी फ़िल्म का मुशाहिदा किया। ये फ़िल्म इंसिदाद जराइम बिलख़ुसूस ख़वातीन के ख़िलाफ़ जराइम की रोक थाम केलिए हिक्मत-ए-अमली तय्यार करने की ज़रूरत को उजागर करती है।

उन्होंने कहा कि समाज के बाज़ गोशों में मर्दों की ज़हनियत दकियानूसी है और अब वो समझते हैं कि ख़वातीन का दायरा कार महिदूद है और ख़वातीन को उन के मातहत होना चाहिए। उन्होंने बताया कि हिन्दुस्तान में रोशन ख़्याल मर्दों की ख़ातिरख़वाह तादाद पाई जाती है, लेकिन मर्दों की अक्सरियत ख़वातीन की ज़िंदगी को कंट्रोल करती है।

किरण बेदी ने कहा कि रज़ाकाराना ख़िदमात के ज़रिए मैं ने बाज़ ख़ानदानों के साथ काम के दौरान हर रोज़ ये मंज़र देखते रही हूँ और मेरे ख़्याल में ये फ़िल्म तमाम हिन्दुस्तानियों की ज़रूरियात की तकमील केलिए जामि सबूत पेश करती है।