जनाब ज़ाहिद अली ख़ान एडीटर सियासत ने आज मर्कज़ी हुकूमत से मुतालिबा किया कि हिंदुस्तान भर में ओक़ाफ़ी जायदादों पर सरकारी और गैर सरकारी क़ब्ज़ों, जायदाद से औक़ाफ़ बोर्डस को महरूम किए जाने के इक़दामात और क़ब्ज़ों में मोलव्विस अवामी नुमाइंदों, सियासतदानों, सरकारी ओहदेदारों और सफेदपोश सरमाया दारों के रोल की सी बी आई के ज़रीया तहकीकात करवाई जाय।
जनाब ज़ाहिद अली ख़ान ने दरगाह हज़रत हुसैन शाह वली (र) से मुंसलिक ओक़ाफ़ी जायदाद के तनाज़ा में हाईकोर्ट के सादिर करदा फैसला पर रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करते हुए कहा कि अदालत उल आलिया का इख़तियार करदा मौक़िफ़ ये साबित करता है कि हुकूमत का अमल बहैसियत निगरानकार सेयानत औक़ाफ़ के तक़ाज़ों के मुनाफ़ी रहा है।
हाईकोर्ट के फैसला से एक बार फिर ये साबित होगया है कि हमारी अदलिया से मज़लूमीन के साथ अदल होता है चाहे ना इंसाफ़ी करने वाले कितने ही ताक़तवर क्यों ना हो। इस फैसला से अदलिया पर मुस्लमानों के एतिमाद मज़ीद पुख़्ता हुआ है। वक़्फ़ ट्रब्यूनल की सतह पर भी और अब हाईकोर्ट की सतह पर भी हुकूमत को हज़ीमत का सामना करना पड़ा जो इस बात का ग़म्माज़ है कि ओक़ाफ़ी जायदादों की सेयानत के लिए हुकूमत की मनफ़ी रविष के ख़िलाफ़ उर्दू सहाफ़त की शुरू करदा मुहिम हक़ बजानिब थी।
ये एक तरह से उर्दू सहाफ़त की सेयानत औक़ाफ़ तहरीक की कामयाबी है जिस ने बरवक़्त हुकूमत के ग़ासिबाना इक़दामात की निशानदेही करते हुए मिल्लत को जगाया था। उन्हों ने कहा कि मुस्लमान हुकूमत से इस मुआमला में ना मुराआत के तलबगार हैं और ना ही ख़िलाफ़-ए-क़ानून किसी किस्म की मदद के ख़ाहां हैं बल्कि वो चाहते हैं कि इन के अज्दाद ने ख़िदमत-ए-ख़लक़ के जज़बा के तहत अपनी जिन कीमती जायदादों को वक़्फ़ किया था इस से मिल्लत इस्लामीया को इस्तिफ़ादा का मौक़ा दिया जाय।
उन्हों ने कहा कि कम अज़ कम अब तो मर्कज़ी और रियासती हुकूमतों के सरबराहों को ये तस्लीम कर लेना चाहीए कि अब क़ानूनी पेचीदगियों का फ़ायदा उठाते हुए ओक़ाफ़ी जायदादों को हड़प लिया नहीं जा सकता है। मिल्लत का शऊर काफ़ी बेदार होचुका है और अब वो हुकूमत के उसे किसी इक़दाम पर ख़ामोश बैठने नहीं वाली है।
जनाब ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा कि रियासती हुकूमत को चाहीए कि फ़ौरी अपनी ग़लती तस्लीम करते हुए ना सिर्फ दरगाह हज़रत हुसैन शाह वली(र) से मुंसलिक ओक़ाफ़ी जायदाद से दसतबरदारी इख़तियार करे बल्कि दीगर मुआमलतों में भी अदालत से हज़ीमत उठाने से क़बल ही इस्लाही इक़दाम करले और वक़्फ़ बोर्ड को ओक़ाफ़ी जायदादें लौटा दे।
उन्हों ने कहा कि अगर ओक़ाफ़ी जायदादों के स्क़ाम के हजम का तख़मीना किया जाय तो ये अब तक मंज़रे आम पर आने वाले तमाम स्क़ामस और स्कैंडलस में सब से बड़ा साबित होगा। एडीटर सियासत ने कहा कि अगर हुकूमतें संजीदा होकर रियासती औक़ाफ़ बोर्डस को मुस्तहकम करती हैं और ओक़ाफ़ी जायदादों के नज़म को बेहतर बनाती है तो मुस्लमानों को हुकूमत से मज़ीद किसी किस्म की मुराआत और ग्रान्ट्स की ज़रूरत बाक़ी नहीं रहेगी
और कुछ ही अर्सा में मुल्क के सारे मुस्लमानों का तालीमी, समाजी-ओ-इक़तिसादी मौक़िफ़ दीगर अब्ना-ए-वतन से मजमूई एतबार से बेहतर होजाएगा। जनाब ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा कि सिर्फ हाईटेक सिटी से शमसाबाद एयर पोर्ट तक की पट्टी में 9,000 एकड़ ओक़ाफ़ी जायदादें हैं जिन में से 70 फीसद से ज़ाइद जायदादों पर क़बज़े होचुके हैं।
हाईकोर्ट फैसला से अब ओक़ाफ़ी जायदादों पर क़ब्ज़ों की बर्ख़ास्तगी के इमकानात रोशन होगए हैं इस लिए रियासती हुकूमत को चाहीए कि इन क़ब्ज़ों की बर्ख़ास्तगी में वक़्फ़ बोर्ड के साथ भरपूर इआनत करे और बोर्ड को इस ज़िमन में ख़ातिर ख़वाह इख़्तयारात अपने तौर पर अता करे।