पी एम के बानी डाक्टर एस रामडोस ने आज हुकूमत केरला के ओहदेदारों पर इल्ज़ाम आइद करते (आरोप लगाते) हुए कहा कि इन साज़-ओ-सामान को रोक दिया गया है जो दरअसल मुल्लापेरियार डैम (mullaperiyar dam) में मौजूद सूराख़ बंद करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले थे ताकि डैम को कमज़ोर ही रहने दिया जाए ।
लिहाज़ा ज़रूरत इस बात की है कि पड़ोसी रियासत ( राज्य) पर मआशी तहदीदात ( पाबंदी) आइद की जाए जब तक हुकूमत उस वक़्त तक केरला तमिलनाडू के ओहदेदारों को डैम पर काम शुरू करने की इजाज़त नहीं दे देती । छः के मिनजुमला चार बड़े बड़े सूराखों को बंद कर दिया गया है ।
केरला के जंगलाती ओहदेदारों ने हाल ही में तमिलनाडू से आने वाली सीमेंट की लारियों को रोक दिया था । डैम को कमज़ोर करने की हुकूमत केरला की कोशिशें काबिल-ए-मुज़म्मत हैं । यहां इस बात का तज़किरा भी ज़रूरी है कि रियासत केरला को तरकारीयों चावल और गेहूं के लिए तमिलनाडू पर इन्हिसार (निर्भर) करना पड़ता है ।
लिहाज़ा ऐसी सूरत-ए-हाल में हुकूमत का ये रवैय्या बचकाना है जिसके ख़िलाफ़ थीनी डिस्ट्रिक्ट के किसान भी एहतिजाज करने वाले हैं । अगर किसानों के एहतिजाज में शिद्दत पैदा हो गई तो केरला और तमिलनाडू की सरहद पर हालात बिगड़ते देर नहीं लगेगी । लिहाज़ा ये हुकूमत केरला का फ़र्ज़ है कि वो इस नाज़ुक सूरत-ए-हाल को समझे और साथ क़ौमी यकजहती का भी मुज़ाहरा ( प्रदर्शन) करते हुए मुल्लापेरियार डैम में मौजूद सूराखों को बंद करने की इजाज़त दे और अगर ऐसा नहीं किया गया तो केरला को दूध चावल तरकारियां और दीगर अशीया ( दूसरी चीजें) जिन रास्तों से रवाना की जाती हैं इन रास्तों को मस्दूद कर ( रोक) दिया जाए ।
वाज़िह रहे कि मुल्लापेरियार डैम रियासत केरला और तमिलनाडू के दरमयान दो मुल्लाओं के बीच मुर्ग़ी हराम जैसा हो चुका है । सूरत-ए-हाल कभी इंतिहाई ( ज़्यादा) नाज़ुक हो जाती है और कभी ऐसा लगता है कि बातचीत के ज़रीया मुआमला की यकसूई की जा रही है लेकिन हालात फिर ग़ैर यक़ीनी हो जाते हैं ।
बहरहाल इस तरह की आंखमिचौली एक अर्सा से खेली जा रही है । यहां इस बात का तज़किरा ज़रूरी है कि मुल्लापेरियार डैम को लेकर रियासत केरला और तमिलनाडू में एक अर्सा से रसा कुशी जारी है जहां डैम की ऊंचाई में इज़ाफ़ा का भी मुतालिबा शामिल है।