मुस्लमानों की तरक़्क़ी के लिए इक़दामात ज़रूरी : मायावती

लखनऊ,०१ दिसम्बर:(पी टी आई) उत्तरप्रदेश में असॆंबली इंतिख़ाबात से क़बल चीफ़ मिनिस्टर मायावती ने मर्कज़ से दरख़ास्त की है कि अक़ल्लीयतों ख़ासकर मुस्लमानों की तरक़्क़ी के लिए इक़दामात किए जाएं।

सरकारी तर्जुमान ने कहा कि चीफ़ मिनिस्टर मायावती ने वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह को 14 सितंबर को एक मकतूब लिखा था जिस में अक़ल्लीयतों ख़ासकर मुस्लमानों की तरक़्क़ी के लिए दरख़ास्त की गई थी और उन्हें आबादी की बुनियाद पर तहफ़्फुज़ात फ़राहम करने के लिए ज़ोर दिया गया था।

तर्जुमान ने कहा कि वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने चीफ़ मिनिस्टर के मकतूब का 24 अक्टूबर को जवाब दिया था। इस के बाइस चीफ़ मिनिस्टर मायावती ने 24 नवंबर को वज़ीर-ए-आज़म के नाम एक और मकतूब रवाना किया और उन से दरख़ास्त की कि मुस्लमानों की तरक़्क़ी और बहबूद के लिए वसीअ तर इक़दामात किए जाएं। अपने मकतूब में मायावती ने कहा कि इन की हुकूमत अक़ल्लीयतों के बहबूद के लिए हस्सास और पाबंद अह्द है।

एजैंसीज़ के मुताबिक़ अपने ज़हन को असैंबली इंतिख़ाबात के लिए तैय्यार करते हुए मायावती ने मुस्लमानों के हक़ में बहबूद की आवाज़ उठाई है। उन्हें ओ बी सीज़ की भी फ़िक्र लाहक़ होगई ही। मर्कज़ी हुकूमत की तवज्जा अक़ल्लीयतों ख़ासकर मुस्लमानों और ओ बी सीज़ की बहबूद के लिए मुक़र्रर करदा फंड्स की जानिब मबज़ूल करवाई। 24 नवंबर को लिखे गए मकतूब की नक़ूल आज मीडीया को जारी की गई।

मायावती ने अपने मकतूब में निशानदेही की कि मैं 1995-ए-से ही जब में अपनी पहली हुकूमत तशकील दी थी मुस्लमानों के काज़ के लिए काम कर रही हूँ और उन की बहबूद के लिए हमेशा पाबंद अह्द रही हूँ। मैंने तमाम रियास्ती सरकारी मुलाज़मतों में मुस्लमानों के ज़ाइद अज़ 35 ज़ातों और ज़ेली ज़ातों के लिए रोज़गार में तहफ़्फुज़ात का हुक्म जारी किया था।

ये अहकाम ओ बी सी के ज़ुमरे के तहत दिए गए थी। उन्हों ने मज़ीद कहा कि उन्हों ने अब लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी के बानी कांशी राम के नाम से एक नई यूनीवर्सिटी क़ायम कर चुकी हैं जिस में उर्दू, अरबी और फ़ारसी ज़बाबों को फ़रोग़ दिया जाएगा। इस के इलावा उन्हों ने तमाम मुस्लिम लड़कीयों को आलिम कोर्स (एंटर मीडीट) पूरा करने के लिए फी कस एक साईकल के इलावा 25 हज़ार रुपय की स्कालरशिप भी जारी है।

मायावती ने वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह की तवज्जा अक़ल्लीयती इदारा जात के ज़ुमरे के तहत इस्लामी तालीमी इदारों को मुस्लिमा क़रार देने तवील मुद्दत से ज़ेर अलतवा मसला की जानिब भी मबज़ूल करवाई। इस सिलसिले में रियास्ती असैंबली की जानिब से एक बिल भी मंज़ूर किया गया है।

लेकिन ये बिल हनूज़ मर्कज़ी हुकूमत के पास ज़ेर अलतवा ही। मायावती ने अपने मकतूब में मज़ीद बताया कि मर्कज़ी हुकूमत ने हमा शोबा जाती तरक़्क़ीयाती मंसूबे के लिए 381 करोड़ ग्रांट मंज़ूर की है जिस के मिनजुमला रियास्ती हुकूमत ने पहले ही मुसावी 97 करोड़ की ग्रांट जारी की है। मुस्लमानों की तरक़्क़ी और बहबूद के लिए किए गए दीगर इक़दामात का भी उन्हों ने हवाला दिया। ओ बी सीज़ में भी सब से ज़्यादा पसमांदा अफ़राद के लिए फंड्स मुक़र्रर किए गई।

मर्कज़ी हुकूमत ने मुस्लिम तलबा-ए-के लिए स्कालरशिपस की मद में 5286 करोड़ रुपय का फ़ंड मुख़तस करने का वाअदा किया। जबकि रियास्ती हुकूमत को सिर्फ 346 करोड़ रुपय वसूल हुई। जबकि माबाक़ी 3372 करोड़ की ग्रांट मर्कज़ के पास ही रह गई।

मनमोहन सिंह से अपील करते हुए चीफ़ मिनिस्टर यूपी मायावती ने लिखा है कि मैं आप से दरख़ास्त करती हूँ कि आप मेरे इस मकतूब के हवाले से अक़ल्लीयतों ख़ासकर मुस्लिम तबक़ा की बहबूद और तरक़्क़ी पर ख़ुसूसी तवज्जा दें।