( आरिफ कुरैशी )जनाब मुहम्मद नूर रहमान शेख़ को नया हिंदूस्तानी कौंसल हज बराए जद्दा मुक़र्रर किया गया है। मुहम्मद नूर उलरहमान शेख़ का ताल्लुक़ हिंदूस्तान के एक शहर मनी पूर से है जिन की उम्र 32 साल है वो अपनी इबतिदाई तालीम मनी पूर में ही मुकम्मल की।
2002 मैं हिन्दू यूनीवर्सिटी न्यू दिल्ली से बी ए पोलीटिक्ल साईंस में किया और दर्जे अव्वल में कामयाबी हासिल की वो 2003 से 2004 तक इंडियन रीवैन्यू सरविस (आई आर ऐस में अपने ख़िदमात अंजाम देते रहे।
2004 मैं इंडियन फ़ारेन सर्विस (आई उन ऐस ) नई दिल्ली से वाबस्ता हुए। 2005 मैं दिल्ली ही में मुलाज़मत के दौरान एम ए पोलीटिक्ल साईंस क्या । वो 2006 से 2009 तक उरदुन के हिंदूस्तानी सिफ़ारतख़ाना में थर्ड सेक्रेटरी की हैसियत से ख़िदमात अंजाम दिया वहीं पर सेकण्ड सेक्रेटरी की हैसियत से तरक़्क़ी हासिल की । उरदुन के एक यूनीवर्सिटी में वो अरबी लिखना पढ़ना और बोलना सीखा ।
वो 2009 से 2012 तक वज़ारत उमूर ख़ारिजा नई दिल्ली (मग़रिबी एशीया शेमाली अफ़्रीक़ा ) में जवाइंट सेक्रेटरी की हैसियत से ख़िदमात अंजाम दे रहे थे । 7 अप्रैल 2012 को इंडियन क़ोनसलेट जनरल ऑफ़िस जुदा में कोंसल हज की हैसियत से अपने नए ओहदा का जायज़ा हासिल किया। वो साबिक़ कौंसल हज बी ऐस मुबारक की जगह अपने ख़िदमात अंजाम देंगे ।
कौंसल हज मुहम्मद नूर रहमान शेख़ ने सियासत न्यूज़ को बताया कि वो 2007 और 2008 मैं उरदुन की इंडियन एंबेसी में अपनी मुलाज़मत के दौरान दो बार हज का मुक़द्दस फ़रीज़ा अदा करने के लिए मक्का मोकर्रमा और मदीना मुनव्वरा आचुके हैं इस लिए उन को हिंदूस्तानी हुज्जाज किराम के मुश्किलात और परेशानीयों का अच्छी तरह अंदाज़ा है ।
उन्हों ने मज़ीद बताया कि वो अपनी जानिब से हर मुम्किन कोशिश करेंगे कि हिंदूस्तानी हुज्जाज किराम की ख़िदमत में कोई कसर बाक़ी ना रहे । उन्हों ने मज़ीद कहा कि ये अल्लाह ताला का मुझ पर बड़ा एहसान-ओ-करम है कि इस ने हुज्जाज किराम की ख़िदमात के लिए मुझे पसंद फ़रमाया
अब मेरा अव्वलीन फ़र्ज़ है कि मैं हिंदूस्तानी आज़मीन-ए-हज्ज के लिए रिहायशी इमारतों का बंद-ओ-बस्त बेहतर से बेहतर तरीक़े से करूं ता कि हमारे आज़मीन-ए-हज्ज आराम-ओ-राहत के साथ हज का मुक़द्दस फ़रीज़ा अदा करसकें ।
उन्हों ने मज़ीद बताया कि 2012 के हज के लिए अभी तक ग्रीन कैटिगरी में 35 हज़ार हुज्जाज किराम की रिहायश का इंतिज़ाम हो चुका है ये रिहायशी इमारतें हरम शरीफ़ से 1500 मीटर के अंदर हैं । मज़ीद उन्हों ने बताया कि अल-अज़ीज़या मुहल्ले की इमारतों को देखा जा रहा है मगर अभी तक किसी भी इमारत को हासिल नहीं किया गया
क्यों कि हम हर इमारत को अच्छी तरह देख कर हासिल करेंगे और वही इमारत हासिल करेंगे जिस में पानी ,लिफ़्ट ,लाईट ,एयरकंडीशनड और मक्का मुकर्रमा जाने के लिए ट्रांसपोर्ट की सहूलत बा आसानी हो । कौंसल हज ने बताया कि इन की शरीक-ए-हयात एमबी बी ऐस डाक्टर हैं और उन को एक लड़की और एक लड़का है और उन को स्पोर्टस से दिलचस्पी है ।