चौथे एडिशनल सेशन जज अजय कुमार श्रीवास्तव ने राजीव रोशन कत्ल केस मामले में मो शहाबुद्दीन की जमानत पर दोनों फरीकों की बहस सुनने के बाद हुक्म को महफूज़ रख लिया। प्रोसेकुटर हक़ की तरफ से एपीपी रवींद्र कुमार शर्मा ने शहाबुद्दीन की दरख्वास्त का मुखालिफत करते हुए कहा कि तेजाब कांड के चश्मदीद गवाह की कत्ल मामले में नामजद हैं।
उन्हीं के इशारे पर मुजरिमों ने 16 जून, 2014 को डीएवी मोड़ के पास गोली मार कर कत्ल कर दी गयी थी। राजीव रोशन के वालिद चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू ने कहा कि मो शहाबुद्दीन की तरफ से तेजाब कत्ल केस में गवाही बदलने के लिए कत्ल करने की धमकी मिली थी। उसी दौरान मेरा बेटा मोबाइल स्पेयर्स की दुकान का तगादा कर मोटरसाइकिल से घर लौट रहा था। इसी दौरान मुजरिमों ने गोली मार कर उसकी कत्ल कर दी। बचाव हक़ के वकील अभय कुमार राजन ने कहा कि केश डायरी में मुदई चंदा बाबू के अलावा किसी आज़ाद गवाह ने मो शहाबुद्दीन का नाम नहीं लिया है और न ही शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा का ही नाम लिया है। उन पर दफा 120 के तहत केस नहीं बनता है।
वे बेगुनाह हैं, इसलिए उन्हें जमानत दी जाये। चौथे एडिशनल जज मिस्टर श्रीवास्तव ने दोनों फरीकों की बहस सुन कर अपना हुक्म महफूज़ रख लिया। बताते चलें कि नगर थाना केस नंबर 220/14 का तहक़ीक़ात पुलिस विजय कुमार, पुनि सुनील कुमार सिंह, मनोज कुमार सिंह व अनि संजीव कुमार सिंह ने केस का तहक़ीक़ात कर गुजिशता 22 फरवरी, 2015 को मो शहाबुद्दीन के खिलाफ इल्ज़ाम आईद किया था।