मौलाना क़ासिमी का रेलवे की जानिब से गिरफ़्तारी वारंट पर इज़हार ताज्जुब

क़ौमी , मिली-ओ-तालीमी रहनुमा मौलाना इसरार उल-हक़ क़ासिमी ने किशनगंज में ए ऐम यू सैंटर के लिए एहितजाजी धरने के दौरान क़ौमी शाहराह और रेलवे ट्रैक पर नक़ल हमल में ख़लल की पादाश में रेलवे की तरफ़ से गिरफ़्तारी का वारंट जारी किए जाने पर हैरत का इज़हार किया ही।

उन्हों ने कहा कि धरना निहायत ही पुर अमन था जिस में ढाई लाख से ज़्यादा लोगों की शिरकत के बावजूद कोई नाख़ुशगवार वाक़िया पेश नहीं आया।किसी सरकारी इमारत या असासे को मामूली ठेस तक नहीं पहुंची।उन्हों ने कहा बावजूदिके अगर उन्हें गिरफ़्तार किया जाता है और जेल भेजा जाता है तो वो क़ानून और अदालत का एहतिराम करेंगी।

मौलाना ने कहा कि वो नाख़्वान्दगी से नजात की अपनी मुहिम में हिंदूस्तान को गु़लामी से नजात की इस्लाफ़ की मुहिम से इस्तिफ़ादा कर रहे हैं जिन्होंने ग़ुलाम हिंदूस्तान में जेलों को आबाद किया था।

मौलाना क़ासिमी ने कहा कि बिहार ख़ुसूसन पूर्णिया कमिशनरी के लोगों की तालीमी तरक़्क़ी और ख़ुशहाली केलिए वो जमहूरी तरीक़े से हर क़ुर्बानी देने को तैय्यार हैं ख़ाह इस रास्ते में क़ैद-ओ-बंद की साइबत क्यों ना उठानी पड़ी।

पूर्णिया कमिशनरी तालीमी और मुआशरती लिहाज़ से इंतिहाई पसमांदा इलाक़ा है जहां तालीम की शरह आज भी बहुत कम है और किशनगंज में ए ऐम यू सैंटर का क़ियाम इसी मंज़र नामे को यकसर बदलने की एक कोशिश हीजस के लिए हुकूमत बिहार से ज़मीन हासिल करने केलिए पिछले साल 13 अक्तूबर को बड़े पैमाने पर तालीमी बेदारी मुहिम के तहत धरना दिया गया था जिस में बुला तफ़रीक़ मज़हब-ओ-मिल्लत ढाई लाख से ज़्यादा मर्द ख़वातीन ने हिस्सा लिया था