म्यांमार में कुदरत का कहर, बाढ़ के कारण डेढ़ लाख लोग घर छोड़ने को मजबूर!

बाढ़ग्रस्त दक्षिणपूर्वी म्यांमार में फिर से बारिश होने के कारण तटबंधों के टूटने का खतरा है। यहां बाढ़ के कारण करीब 150,000 लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा और एक दर्जन लोगों की मौत हुई है। पूरे चार प्रांतों में खेती के विशाल भूभाग पर पानी भर गया है और बचाव दल नाव से ग्रामीणों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

जो ग्रामीण अक्षम हैं या अपना घर छोड़ने से इंकार कर रहे हैं उन्हें खाना मुहैया कराया जा रहा है। बागो क्षेत्र में मदौक शहर में बाढ़ का पानी तटबंधों की ऊपरी सीमा से केवल कुछ इंच नीचे है लेकिन स्थानीय लोगों को डर है कि मानसून की ताजा बारिश से बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।

बचाव टीम के नेता हलैंग मिन ओओ ने बताया, ‘‘अगर अगली बाढ़ तक यह तटबंध मजबूत नहीं बना रहता है तो, कई और गांवों पर भी अधिक खतरा होगा।’’ वह स्वयंसेवकों के कार्य का निरीक्षण कर रहे थे जो बाढ़ पीड़ितों के लिए नाव पर भोजन की सामग्री रख रहे थे।

सरकारी मीडिया की खबरों में कहा गया है कि 148,386 लोग फिलहाल 327 शिविरों में शरण लिए हुए हैं. गौरतलब है कि दक्षिणपूर्व के कुछ निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घट रहा है लेकिन, देश में अभी मानसून का मौसम शुरू हुआ है तथा आने वाले हफ्तों में और बारिश हो सकती है.

समूचे बागो, केरन, मोन और तानिनथारी प्रांत में लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के आदेश दिए गए हैं। इन इलाकों में दर्जनों बांध और जलाशय में पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है।