यहां बनाया जा रहा है तलाक़ को आसान, ताकि कानूनी उलझनों से बची जाये!

शादी का मौका जोड़ों के लिए खुशी का मौका होता है, लेकिन तलाक उनके लिए न सिर्फ मानसिक समस्याएं लाता है। अकसर उन्हें कानूनी समस्याओं का भी सामना करना होता है। यूरोपीय संघ में तलाक के नियमों को आसान बनाया है।

जब शादीशुदा जोड़े अलग होते हैं तो उसके साथ बहुत सारे सवाल जुड़े होते हैं। चल संपत्ति का बंटवारा कैसे होगा, दाम्पत्य के दौरान हासिल पेंशन अधिकारों और बीमा पॉलिसी का बंटवारा कैसे होगा, बच्चों की देखभाल का अधिकार किसे होगा।

और यदि जोड़ा दो अलग अलग मुल्क का हो, तो दोनों पर अलग अलग कानून लागू होते हैं और इनका फैसला और भी मुश्किल हो जाता है। आखिर में फैसला अदालतों को करना है और जोड़े वकीलों की मदद पर निर्भर होते हैं।

यूरोपीय संघ ने अंतरराष्ट्रीय दम्पत्तियों के तलाक या किसी एक पार्टनर की मौत के मामले में सम्पत्ति के बंटवारे को आसान बनाया है। मंगलवार को यूरोपीय संघ के नए नियम लागू हुए हैं जिनमें तय किया गया है कि जोड़े के लिए कौनसी अदालत जिम्मेदार है और किस राष्ट्रीय कानून के आधार पर फैसला लिया जाएगा।

और यह इस बात पर निर्भर करेगा कि जोड़ा कहां रह रहा है या फिर उनकी शादी कहां हुई है। इन नियमों से रजिस्टर्ड पार्टनरशिप वाले जोड़े भी प्रभावित होंगे जिनके पास अलग अलग देशों की राष्ट्रीयता है। कई बार तो जोड़े न सिर्फ अलग अलग देशों के होते हैं, बल्कि वे किसी तीसरे देश में रह रहे होते हैं।

इन नियमों का असर उन भारतीय जोड़ों पर भी होगा जिनमें से एक की राष्ट्रीयता भारतीय है और दूसरे की यूरोपीय संघ के किसी देश की। लेकिन मुख्य रूप से नए नियम यूरोपीय संघ के देशों के लिए लागू होंगे। नियमों के अनुसार तलाक की अर्जी साझा तौर पर या अकेले उस देश में डाली जा सकती है जहां जोड़ा रह रहा है या पहले साथ रहा है।

अर्जी उन देशों में भी डाली जा सकती है जहां आवेदनकर्ता कम से कम छह महीने से रह रहा है और उस देश का नागरिक है। नागरिक न होने पर अर्जी डालने के लिए कम से कम एक साल का निवास जरूरी होगा।

यूरोपीय संघ के नए नियम शुरू में 18 देशों में लागू होंगे क्योंकि सभी देश नए नियमों पर सहमत नहीं हुए हैं। सीमापारीय तलाक के नियमों पर सहमति पाने वाले देशों में जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन शामिल हैं।

आयरलैंड, डेनमार्क, पोलैंड और कई अन्य पूर्वी यूरोपीय देश इसमें शामिल नहीं हैं। यूरोपीय आयोग के अनुसार यूरोपीय संघ के देशों में करीब 1.6 करोड़ द्विराष्ट्रीय जोड़े ऐसे हैं, जो या तो शादीशुदा हैं या रजिस्टर्ड पार्टनरशिप में रह रहे हैं।

नए नियमों से तलाक लेने वाले जोड़ों को तो आसानी होगी ही, हर साल करीब 35 करोड़ यूरो का अदालती खर्च कम करने में भी मदद मिलेगी. इससे अदालतों पर बोझ भी कम होगा।

साभार- ‘डी डब्ल्यू हिन्दी’