यासिर अर्फ़ात के नायब को कत्ल करने इसराईल का एतराफ़

इसराईल ने पहली मर्तबा एतराफ़ किया है कि इस के कमांडोज़ ने 1988 में लीजैंड फ़लस्तीनी लीडर यासर अर्फ़ात के नायब को तीवनस में एक हमले में क़तल कर दिया था।

ग़ैर मुल्की ख़बर रसां इदारे के मुताबिक़ इस कार्रवाई में मुलव्विस (शामिल) इसराईल के दो आला फ़ौजी ओहदेदार उस वक़्त दो सयासी ओहदों पर फ़ाइज़ हैं जिन में वज़ीर-ए-दिफ़ा ऐहूद बराक और दूसरी शख़्सियत नायब वज़ीर-ए-आज़म मोशे यालोन शामिल हैं।

इस कार्रवाई के वक़्त ऐहूद बराक फ़ौज के नायब सरबराह थे और यालोन कमांडो यूनिट सीरत मताकल के सरबराह थे। फ़लस्तीनी लीडर के अंधे क़तल की कार्रवाई में इन दोनों साबिक़ फ़ौजी ओहदे दारों के किरदार की वज़ाहत नहीं की गई और दोनों के दफ़ातिर ने भी इस ख़बर पर कोई तबसरा करने से इनकार किया है।

वाज़ेह रहे कि इसराईल पर ख़लील अलोज़ीर उल-मारूफ़ अब्बू जिहाद के क़तल के इल्ज़ाम में शुबा ज़ाहिर किया जाता रहा है लेकिन अब पच्चीस साल के बाद सहयोनी रियासत के फ़ौजी संसर ने उन के कत्ल से मुताल्लिक़ मालूमात को इब्रानी रोज़नामे यदीओत अहरोनोत में शाय करने की इजाज़त दी है।

उस वक़्त यासर अर्फ़ात की सरबराही में तंज़ीम आज़ादी फ़लस्तीन के दफ़ातिर तीवनस में क़ायम थे। अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ बहरमतोसता से एक इसराईली कशती के ज़रीये छब्बीस इसराईली कमांडोज़ तीवनस के साहिल तक पहुंचे थे।