राजस्थान के अलवर में हुए मॉब लिंचिंग मामले में राज्य सरकार ने मान लिया है कि कथित गोतस्कर अकबर उर्फ रकबर की मौत पुलिस हिरासत में हुई थी। सरकार ने कहा है कि घटना के बाद पुलिस को सबसे पहले पीडि़त को अस्पताल लेकर जाना चाहिए था, लेकिन वह गाय की हिफाजत में लग गई।
मंगलवार को राज्य के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि पुलिसकर्मियों की गलती यह रही कि ललावंडी में भीड़ से अकबर को छुड़ाने के बाद वे सीधे उसे अस्पताल नहीं ले गए। पुलिसकर्मी पहले जब्त की गई गायों को गोशाला पहुंचाने में जुट गए जिससे उसकी मौत हो गई। इस मामले में एक पुलिसकर्मी को निलंबित करने के साथ ही तीन को लाइन हाजिर किया गया है।
पहले यह बताया जा रहा था कि भीड़ ने अकबर को घेरकर मारपीट की, लेकिन हमारी अब तक की पड़ताल में सामने आया है कि चार-पांच लोग ही घटनास्थल पर मौजूद थे। सोमवार को घटनास्थल का दौरा कर लौटे चार पुलिस अधिकारियों से रिपोर्ट भी मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्र सरकार को मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजी जाएगी।
कटारिया ने इस मामले की न्यायिक जांच कराने की बात कही। साथ ही मृतक के परिजनों को सवा लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा भी की। जिला विधिक सहायता समिति अपने स्तर पर अलग से मुआवजा देगी और यदि मानवाधिकार आयोग सहित अन्य कोई संस्था अलग से सहायता के लिए कहेगी तो वह भी उपलब्ध कराई जाएगी।
केंद्र सरकार के निर्देश के बाद कटारिया मंगलवार को अलवर पहुंचे। उन्होंने पहले यहां वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की और बाद में रामगढ़ थाने जाकर रिकॉर्ड जांचा। रामगढ़ थाने में ही अकबर की मौत होने की बात सामने आई है।
उन्होंने ललावंडी गांव के उस स्थान का भी मौका मुआयना किया, जहां ग्रामीणों ने हरियाणा के नूंह जिला निवासी अकबर उर्फ रकबर की कथित रूप से पिटाई की थी और पुलिस उसे वहां से अपने साथ गाड़ी में लेकर गई थी।