रमज़ान में भी बगैर इलान बर्क़ी(बिजली) कटौती जारी

रमज़ान उल-मुबारक के आग़ाज़ से क़ब्लचीफ़ मिनिस्टर किरण कुमार रेड्डी ने जायज़ा इजलास में बर्क़ी(बिजली) और पानी की मूसिर सरबराही को यक़ीनी बनाने और मसाजिद के अतराफ़ सफ़ाई के इंतिज़ामात पर तवज्जा की हिदायत दी थी लेकिन इन हिदायात को ओहदेदारों ने नज़र अंदाज करदिया और पुराने शहर के अवामी नुमाइंदे भी इस पर अमल आवरी को यक़ीनी बनाने नाकाम होगए ।

इबतिदाई चंद दिन बर्क़ी(बिजली) की सरबरा ही पर तवज्जा दी गई लेकिन फिर बर्क़ी(बिजली) सरबराही की सूरत-ए-हाल अबतर(खराब) है । अब जबकि रमज़ान के दूसरे दहे का आग़ाज़ होचुका है सूरत-ए-हाल में किसी तबदीली के आसार दिखाई नहीं देते ।सरकारी तौर पर अगरचे रोज़ाना तीन घंटे बर्क़ी(बिजली) कटौती का ऐलान किया गया लेकिन इन औक़ात की पाबंदी नहीं की जा रही है ।

इन औक़ात के बरख़िलाफ़ रोज़ाना 5 ता 6 घंटे बर्क़ी(बिजली) कटौती हो रही है बसा औक़ात तो इफ़तार ,तरावीह और सेहर के औक़ात में सरबराही मुनक़ते(कट) हो रही है ।इस तरह हुकूमत और अवामी नुमाइंदों के दावे खोखले साबित हुए । पानी की सरबराही का हाल इतमीनान बख़श नहीं है बारिश के बाइस अगरचे ज़ख़ाइर आब की सतह में इज़ाफ़ा(बढ़ोतरी) हुआ लेकिन पुराने शहर के अवाम पानी की क़िल्लत से नजात हासिल ना करसके ।

पुराने शहर की सड़कों की अबतर(खराब) सूरत-ए-हाल के बारे में कुछ कहने की ज़रूरत नहीं । बलदिया ने ख़ुसूसी फ़ंड से सड़कों की मुरम्मत का काम अंजाम करने का ऐलान किया था लेकिन ये महिज़ ऐलान ही साबित हुआ । ख़राब सड़कों से मसाजिद के क़रीब पानी जमा रहता है जिस से मुस्लियों को दुशवारी होरही है ।

पुराने शहर के तमाम इलाक़ों को छोड़ेए सिर्फ़ अहम इलाक़ों की बड़ी मसाजिद के अतराफ़ सफ़ाई के इंतिज़ामात का जायज़ा लें तो कचरे के अंबार और बदबू-ओ-ताफ़्फ़ुन के सिवा कुछ नहीं मिलेगा । बड़ी मसाजिद के अतराफ़ भी कचरे की निकासी के कोई इंतिज़ामात नहीं है ।

बलदी हुक्काम को चाहीए कि इन मसाइल पर फ़ौरी तवज्जा दें। अल-ग़र्ज़ रमज़ान उल-मुबारक से क़ब्लहुकूमत और अवामी नुमाइंदों ने जो ऐलानात ,तयक़ुनात दीए उन से मसाइल जूं के तूं बरक़रार हैं और अवाम को कोई राहत नहीं मिली ।