पिछले इंतेखाबी नतीजों का दर्द झेल रहे लालू प्रसाद यादव इस बार राजद-लोजपा और कांग्रेस से इत्तेहाद यकीनी करने में जुट गए हैं। 15 दिनो में दूसरी बार कांग्रेस के नायब सदर राहुल गांधी से मुलाकात कर उन्होंने बीजेपी को रोकने के लिए इत्तेहाद का ऐलान करने की गुजारिश किये है। कांग्रेस भी लालू से इत्तेहाद को तैयार होती दिख रही है। हालांकि लालू को कांग्रेस और लोजपा की ओर से साफ कर दिया गया है कि इत्तेहाद के लिए राजद को बड़ा दिल दिखाना पड़ सकता है।
राजद को छोड़कर बाकी किसी पार्टी ने अभी तक इत्तेहाद का ऐलान तो नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि तीनों पार्टी एक साथ बैठ सकते हैं। कांग्रेस के ज़राये इसे ही इशारा मान रहे हैं कि कभी राजद से इत्तेहाद के मुखालिफ रहे राहुल ने दोबारा लालू प्रसाद को मुलाकात का वक्त दे दिया।
ध्यान रहे कि लोजपा सदर रामविलास पासवान पहले ही कांग्रेस सदर सोनिया गांधी से मुलाकात कर उन्हें फैसला लेने की गुजारिश कर चुके हैं। इतवार के रोज़ कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी दिग्विजय सिंह भी पासवान से मिल चुके हैं। माना जा रहा है कि उन्होंने भी राजद-लोजपा-कांग्रेस इत्तेहाद की हिमायत की। दिग्विजय पहले से लालू के साथ इत्तेहाद की पैरोकारी करते रहे हैं।
लोजपा ने अभी इख्तेयारात तो बंद नहीं किए हैं, लेकिन तकरीबन इतना तय है कि वह कांग्रेस के साथ रहेंगे। बहरहाल, इत्तेहाद के लिए अब लालू को बड़ा दिल दिखाना पड़ेगा। ज़राये की मानें तो लालू को दोनों साथी पार्टियों के लिए तकरीबन डेढ़ दर्जन सीटें छोड़नी पड़ सकती है। पिछली बार लोजपा ने 12 और लालू ने कांग्रेस के लिए सिर्फ दो सीटें छोड़कर बाकी अपने खाते में रख ली थीं। कांग्रेस के इन्कार के बाद उन दो सीटों पर भी राजद के ही उम्मीदवार उतरे थे।
इस बार कांग्रेस को मुनासिब सीट देने के लिए मुम्किन है कि कुछ सीटें लोजपा भी छोड़े, लेकिन ज़्यादा सीटें राजद को जुटानी होगी। मसलन, राजद चार सीटें छोड़े तो लोजपा दो सीटें छोड़ सकती है।