हुकूमत गुजरात ने कहा कि फ़र्ज़ी एनकाउंटर केस के मुल्ज़िम आई पी एस ओहदेदार डी जी वंज़ारा के इस्तीफ़े को वो क़बूल नहीं करेगी जिन्हों ने चीफ़ मिनिस्टर गुजरात नरेंद्र मोदी पर तन्क़ीद करने के बाद इस्तीफ़ा दिया था।
वंज़ारा ने मोदी हुकूमत पर ये इल्ज़ाम आइद किया कि वो अपने वफ़ादार सिपाहियों का तहफ़्फ़ुज़ करने में नाकाम होगई है। ऐडिश्नल चीफ़ सेक्रेटरी दाख़िला इसके नंदा ने कहा कि डी जी वंज़ारा की जानिब से पेश इस्तीफ़े को हम क़बूल नहीं करेंगे।
1987 बैच के मुतनाज़ा आई पी एस ऑफीसर के इस्तीफ़े को क़बूल करने के लिए कोई माक़ूल वजह नहीं है। अगरचे कि नंदा ने वंज़ारा के इस्तीफ़े को क़बूल करने की कोई वजह भी नहीं बताई है। हुकूमत इस सिलसिले में डी ओ पी टी की जानिब से जारी रहनुमाया ना ख़ुतूत पर अमल कर रही है।
59 साला वंज़ारा डिप्टी इन्सपेक्टर आफ़ जनरल पुलिस डी आई जी मर्तबे के ओहदेदार हैं और मोदी के क़रीबी आदमी हैं। इस दौरान नरेंद्र मोदी की ज़ेर-ए-क़ियादत बी जे पी हुकूमत से इस्तीफ़े का मुतालिबा करते हुए अपोज़िशन कांग्रेस ने 6 सितंबर को गुजरात बंद का ऐलान किया है। कांग्रेस क़ाइदीन ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि बी जे पी लीडर्स के स्टिंग ऑप्रेशन से ये साबित हो चुका है कि साबिक़ वज़ीर-ए-दाख़िला हरेन पांड्या क़त्ल के कलीदी साज़िशी को महफ़ूज़ राह फ़राहम की गई। उन्होंने डी जी वंज़ारा के मकतूब के मंज़र-ए-आम पर आने के बाद नरेंद्र मोदी से इस्तीफ़े का मुतालिबा किया।