पटना 9 जून : राजीवनगर थाने के जागृति नगर में तुलसी नर्सिग होम चलानेवाली डॉ सरिता सिन्हा की क़त्ल के लिए मसरूफ पांच मुजरिमों को पुलिस ने जुमा की रात गिरफ्तार कर लिया। इन मुजरिमों को डॉ सरिता की क़त्ल की सुपारी उनके शौहर संजय कुमार सिन्हा ने ही दी थी।
संजय सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं। मजिस्ट्रेट कॉलोनी के व्यास नगर से गिरफ्तार किये गये इन मुजरिमों के पास से एक देसी पिस्टल, दो मैगजीन, 10 कारतूस, एक चाकू, चार मोबाइल फोन व दो सिम कार्ड बरामद किये गये हैं।
इन मुजरिमों में विपुलेश कुमार उर्फ विपुल (अशोक नगर, रोड नंबर 10), पंकज कुमार सिंह उर्फ चिंटू (हेमपुर, नौहटा, सहरसा), नीलेश कुमार (गोवाय, नौबतपुर), राकेश कुमार (बेला लक्ष्मणपुर, दानापुर) व राज कुमार सिन्हा (मकससपुर, दुर्गास्थान, मुंगेर) शामिल हैं। वे डॉ सरिता की क़त्ल के लिए उनके घर के पास जमा थे।
दोनों ने कराया था मामला दर्ज
एसएसपी मनु महाराज ने सनीचर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि डॉ सरिता और उनके शौहर संजय कुमार सिन्हा के दरमियान काफी दिनों से तनाज़ा है। दोनों ने एक-दूसरे पर मारपीट, गाली-गलौज और घर में यर्गमाल बनाने का इलज़ाम लगाते हुए राजीवनगर थाने में इसी साल एक मई और दो मई को मामला दर्ज कराया था। इस दरमियान संजय ने बीवी की क़त्ल की साजिश रच डाली। इसके लिए उन्होंने पेशेवर मुजरिमों को दो लाख रुपये की सुपारी दी।
जुमा की रात पांचों मुजरिम डॉ सरिता के घर के पास उनकी क़त्ल की नीयत से इकट्ठा हुए थे। इस दरमियान एसएसपी को इत्तेला मिली। इसके बाद राजीवनगर थाना इंचार्ज धीरेंद्र पांडेय और स्पेशल सेल के अफसरों ने छापेमारी कर उन्हें पकड़ लिया। थोड़ी-सी भी देर होती, तो वे डॉ सरिता को मौत के घाट उतार देते।
नीलेश रख रहा था नजर
संजय ने काफी पहले ही बीवी की हत्या की साजिश रच डाली थी। इसके लिए उन्होंने अपने पुराने जान पहचान नीलेश कुमार को घर के करीब एक मकान में महीना भर पहले किरायेदार के तौर में रखवाया था। वह डॉ सरिता पर नजर रख रहा था। पकड़े गये मुजरिमों में विपुलेश, पंकज और नीलेश का पुराना मुजरिमाना रेकॉर्ड रहा है।
रोहतास के रहनेवाले हैं संजय
डॉ सरिता ने बताया कि संजय के साथ उनकी शादी 11 जून, 1995 को हुई थी। दोनों ने अरेंज मैरेज किया था। वह खुद पटना की रहनेवाली हैं, जबकि पति रोहतास के नोखा के रहनेवाले हैं। शादी के चार साल बाद बेटी और सात साल के बाद एक बेटा हुआ। लेकिन, इससे भी ताल्लुकात में बेहतरी नहीं आया।
साल 2007 से हालत ज्यादा बिगड़ गयी। अक्तूबर, 2009 में उन्होंने ख्वातीन हेल्पलाइन में उस लड़की की शिकायत की। वहां उनकी स्टाफ की भी काउंसेलिंग की गयी थी, जहां उसने मेरे शौहर को छोड़ने की बात कही थी। लेकिन, शौहर को छोड़ने के बजाय 2010 में अपने साथ लेकर चली गयी। 2010 में ही पटना सिविल कोर्ट में घरेलू तशद्दुद का मामला भी दर्ज किया।