मद्रास हाईकोर्ट ने आज शहर के एक वकील की डाँट देते हुए अपनी एक दरख़ास्त में वज़ीर-ए-आज़म और वज़ीर बराए पैट्रोलियम-ओ-क़ुदरती गैस के ख़िलाफ़ ग़ैर पार्लीमानी अलफ़ाज़ का इस्तिमाल करने पर ज़बरदस्त तन्क़ीद की।
चीफ़ जस्टिस राजेश कुमार अग्रवाल और जस्टिस एम सत्य नारायण पर शामिल एक फ़स्ट बंच ने एडवोकेट आर बाला सुब्रामणियम की दरख़ास्त को रद कर दिया और कहा कि एक वकील होने के नाते उन्होंने सब्र-ओ-तहम्मुल का मुज़ाहरा न करते हुए हिंदुस्तानी आईन के मुताबिक़ आला तरीन ओहदों पर फ़ाइज़ शख़्सियात के ख़िलाफ़ नाज़ेबा अलफ़ाज़ का इस्तिमाल किया।
वज़ीर-ए-आज़म और वज़ीर बराए पैट्रोलियम-ओ-क़ुदरती गैस इन ही शख़्सियात में शुमार की जाती हैं। उन्होंने वज़ीर-ए-आज़म के ख़िलाफ़ कुछ नाज़ेबा अलफ़ाज़ इस्तिमाल किए थे जिस पर एडीशनल सॉलीसिटर जनरल आफ़ साउथ इंडिया पी विल्सन ने भी उन्हें तन्क़ीद का निशाना बनाया था।