साबिक़ कांस्टेबल अब्दुल क़दीर को आर्टिफिशियल पाँव लगा दिया गया

हैदराबाद 5 जून – अज़म और हौसला हो तो इंसान हर मुसीबत का सामना कर लेता है और उस की राह में हाइल हर रुकावट उस के लिए मशअले राह साबित होती है । लेकिन इंसान में अज़म और हौसला और इस्तिक़ामत उस वक़्त पैदा होती है जब वो ख़ालिक़े कायनात के हर फैसला को क़ुबूल करते हुए सब्र और तहम्मुल को अपनाए । ऐसा ही कुछ गुज़िश्ता 22 बर्सों से कैद और बंद की सऊबतें बर्दाश्त करने वाले साबिक़ कांस्टेबल अब्दुल क़दीर का हाल है ।

ऐन जवानी में उम्र कैद में डाल दिए जाने , वालिदैन बीवी और मासूम बच्चों से दूर रहने और कड़ी आज़माईशों के बावजूद मुहम्मद अब्दुल क़दीर ने सब्र का दामन नहीं छोड़ा और उन्हें उम्मीद है कि तमाम मुसीबतों को बर्दाश्त करने की सलाहियत अता करने वाला रब्बुल इज़्ज़त उन्हें एक ना एक दिन सज़ाए उम्र कैद से छुटकारा दिलाएगा । क़ारईन ! मुहम्मद अब्दुल क़दीर कई एक बीमारियों में मुबतला हैं उन्हें जहां दिल का आरिज़ा लाहक़ है वहीं वो शूगर के भी मरीज़ हैं।

शूगर के बाइस ही मुहम्मद अब्दुल क़दीर अपने एक पैर से महरूम हो गए ताहम एडीटर सियासत जनाब ज़ाहिद अली ख़ांन की काविशों से एक फ़लाही तंज़ीम ने उन के काटे गए पैर का ईलाज करते हुए एक मस्नूई (आर्टिफिशियल) पैर नस्ब कर दिया है । इस तरह वो वॉकर के सहारे चल सकेंगे । वाज़ेह रहे कि जिस्म में शूगर की सतह ख़तरनाक हद तक बढ़ जाने के नतीजा में अब्दुल क़दीर के एक पैर में इन्फ़ेक्शन हो गया था और उन्हें इस के ईलाज के लिए 11 माह तक गांधी हॉस्पिटल में शरीक रहना पड़ा इसी दौरान इन्फ़ेक्शन को सारे जिस्म में फैलने से रोकने के लिए डाक्टरों ने मुतास्सिरा पैर को जिस्म से अलैहदा कर दिया ।

उस वक़्त अब्दुल क़दीर ने बड़ी हसरत से कहा था कि उन के लिए ज़िंदगी एक बोझ बन गई है । लेकिन हर हाल में वो अल्लाह अज़्ज़ो वजल का शुक्र बजा लाते हैं । एडीटर सियासत जनाब ज़ाहिद अली ख़ांन ने अब्दुल क़दीर को दिलासा देते हुए वाअदा किया था कि चाहे जितना भी ख़र्च आए वो अब्दुल क़दीर के लिए मस्नूई पैर का इंतिज़ाम कर के रहेंगे और अल्लाह ताला ने उन के इस वाअदा की लाज रख ली और अब अब्दुल क़दीर मस्नूई पैर लगाए जाने के बाद अपनी अहलिया साबरा बेगम और बच्चों के सहारा खड़े होने और दो चार क़दम आगे बढ़ाने में कामयाब हो गए हैं ।

वाज़ेह रहे कि उर्दू विरासत कारवां में शिरकत के लिए पहूंचे सदर नशीन प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया जस्टिस मारकंडे काटजू ने भी जनाब ज़ाहिद अली ख़ांन की दरख़ास्त पर गवर्नर और चीफ मिनिस्टर के नाम तहरीर कर्दा मकतूब में अब्दुल क़दीर को इंसानी बुनियादों पर रिहा करने की अपील की । उस वक़्त उन्हों ने गवर्नर और चीफ मिनिस्टर को बताया कि साबिक़ कांस्टेबल अब्दुल क़दीर को दस्तूर की दफ़ा 161 के तहत रिहा किया जा सकता है।