पटना 23 जून : गर्दनीबाग अस्पताल में कहने को आम इलाज से लेकर तर्सिल तक की सहूलत है, लेकिन यहां ख्वातीन डॉक्टर की तादाद काफी नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस अस्पताल की हालत यह है कि यहां आम इलाज के लिए जरूरत पड़नेवाले वसायल की भी कमी है।
यही वजह है कि इस अस्पताल में आम तर्सिल (डिलीवरी), तो आसानी से हो जाता है, लेकिन जब सिजेरियन का केस आता है, तो डॉक्टरों के पसीने छूटने लगते हैं। कई बार एनेस्थेसिस्ट नहीं रहने की वजह ऑपरेशन नहीं हो पाता है और ख्वातीन को पीएमसीएच रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में रोज चार सौ से ज्यादा मरीज ओपीडी में इलाज के लिए आते हैं।
कई बार हुआ हंगामा
देर शाम कोई संगीन मरीज इलाज के लिए आता है, तो वहां एक ही डॉक्टर इलाज के लिए रहते हैं। डॉक्टर का तावुन करनेवाला एक भी अहलकार नहीं होता है। इससे डॉक्टर मरीज का ढंग से इलाज नहीं कर पाते हैं। इस वजह वहां कई मरीज के अहले खाना हंगामा करने लगते हैं। जिससे डॉक्टर गैर महफूज महसूस करते हैं।
“अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है। बावजूद इसके डॉक्टर, नर्स और अहलकार नहीं बढ़ाये जा रहे हैं। शहरी अस्पतालों में तर्सिल (डिलीवरी) काम शुरू कर दिया गया है, लेकिन एनेस्थेसिस्ट की कमी की वजह सिजेरियन करने में परेशानी होती है। तब मरीजों को पीएमसीएच रेफर करते है।”
डॉ मंजु प्रसाद, अस्पताल उपाधीक्षक
“सभी शहरी अस्पतालों में मरीजों का इलाज ठीक से हो और उसे इलाज के लिए भटकना नहीं पड़े, इसकी नेजाम की जा रही है। बहुत जल्द अस्पतालों में डॉक्टरों की तादाद बढ़ायी जायेगी।”
डॉ लखींद्र प्रसाद, सिविल सजर्न