सिर्फ ओ बी सीज़ के लिए कोटा क्यों ?

नई दिल्ली ०४ दिस‌मबर (आई ए एन ऐस) कई हिंदूस्तानी मुस्लमानों का सवाल है कि हुकूमत को इस बिरादरी के लिए इन में से महिज़ चंद पसमांदा तबक़ात की बजाय मजमूई तौर पर तमाम के लिए रिज़र्वेशन पर ग़ौर करना चाहिये।

ताहम बाअज़ दीगर गोशों का एहसास है कि ऐसा करने से मुस्लमान हाशिया पर चले जाएंगी। इस तरह के रद्द-ए-अमल मर्कज़ी वज़ीर सलमान ख़ुरशीद के इस ब्यान पर सामने आए हैं कि हुकूमत सरकारी नौकरीयों और तालीमी इदारों में 27 फ़ीसद कोटे में दीगर पसमांदा तबक़ात (ओ बी सीज़) के लिए भी कोई हिस्सा मुख़तस करने पर ग़ौर कर रही है।

मुस्लमानों के उमूर पर उत्तरप्रदेश के मुमताज़ वकील ज़फ़र याब जीलानी ने कहा कि सलमान ख़ुरशीद का क्या मतलब है? जहां तक पसमांदा मुस्लमानों के लिए रिज़र्वेशन का मुआमला है वो तो उन्हें पहली ही मंडल कमीशन पर अमल आवरी के बाद से ओ बी सी कैटेगरी के तहत हासिल हो रहा है।