मुल्क भर के मौसीकी शायकीनी के जेहन में ये सवाल गूँज रहा है कि क्या सूफी गायक और पद्मश्री से नवाज़े गये हंसराज हंस ने पाकिस्तान में इस्लाम मज़हब कबूल कर लिया है| कई पाकिस्तानी न्यूज साइट्स पर चल रही खबरों में यह दावा किया गया है|
खबर के मुताबिक हंस ने ख्याल जाहिर किया है कि वे जल्द से जल्द मदीना जाना चाहते हैं अब उनका नाम मोहम्मद यूसुफ होगा| हालांकि मूसिकी (म्यूजिक) की दुनिया में वे हंसराज हंस के नाम से ही काम करेंगे |
हंसराज के बेटे युवराज हंस ने इस खबर को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि उनके वालिद ने ऐसा कुछ नहीं किया है | वो जालंधर में ही हैं| तबीयत खराब होने की वजह से वो किसी से बात नहीं कर रहे हैं|
जालंधर के पास सफीपुर गांव में पैदा हुए हंस ने छोटी उम्र से ही गायकी शुरू कर दी थी उनके वालिद सरदार रक्षपाल सिंह व वालिदा सृजन कौर या उनकी पहले की नस्ल में मुसूकी नहीं थी| कई यूथ फेस्टिवलों में फातेह बनने से शुरू हुआ हंस की गायकी का सफर फिल्मों, म्यूजिक इंडस्ट्री व सियासी गलियारों से होता हुआ अभी तक जारी है|
सूफी मुसिकी को नई सिम्त देने वाले हंस को पंजाब की हुकूमत ने राज गायक की भी डिग्री दी है| नुसरत फतेह अली खान के साथ कच्चे धागे फिल्म से बालीवुड में कदम रखने वाले हंस ने नायक, ब्लैक, बिच्छू समेत दर्जन फिल्मों के लिए गीत गाए|
2009 में पंजाब की सियासत में कदम रखने और लोकसभा इंतेखाबात हारने के बाद मुसिकी की दुनिया हंस को मुंबई खींच ले गई मुंबई की गलियां फांकने के बाद वे दोबारा अकाली दल में सरगर्म हुए और पार्टी के लिए काम करने लगे| आइंदा लोकसभा इंतेखाबात के लिए जालंधर से शिरोमणि अकाली दल की टिकट पर उनकी भी दावेदारी मानी जा रही थी, लेकिन उनकी जगह पर मंगल के रोज़ पवन टीनू को उम्मीदवार बना दिया गया|