स्वच्छ भारत अभियान के 29% टॉयलेट सिर्फ कागजों में मौजूद, 36% नकारा: रिपोर्ट

दिल्ली: देश में स्वच्छता अभियान के नाम पर क्या-क्या धांदलीयां हुईं हैं वो तो शायद मौजूद सरकार के सत्ता से जाने के बाद ही पता चलेगा लेकिन फिलहाल जो आकंड़े सामने आ रहे हैं उनसे पता चल रहा है कि स्वच्छता अभियान की हक़ीक़त वो नहीं है जो टीवी पर दिखाई और रेडियो पर सुनाई जा रही है।

इस बात की गवाही भर रही है सेंटर ऑफ़ पॉलिसी रिसर्च की तरफ से करवाये गए अकॉउंटीबिलिटी इनिशिएटिव सर्वे से जिसने देश के पाँच राज्यों हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और बिहार में सर्वे कर हैरान करने वाले आंकड़े जुटाए हैं।

सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वच्छ भारत अभियान की वेबसाइट पर योजना के तहत टॉयलेट बनवाने वाले का लाभ लेने वाले लोगों में से काफी लोगों के नाम दो या इस से अधिक बार लिखे गए हैं जिससे गलत आंकड़े सामने आ रहे हैं।

इसके इलावा बहुत से पते ऐसे भी हैं जिसके बारे में सरकार बता रही है कि वहां टॉयलेट बनाया जा चुका है लेकिन असल में उक्त पते पर टॉयलेट का नामोनिशान भी नहीं है।