मर्कज़ी हज कमेटी ने हज 2013 का अमली मंसूबा तैयार करलिया है और इस मंसूबे में कई एसे फ़ैसले शामिल हैं जिन का रास्त ताल्लुक़ आज़मीन-ए-हज्ज से है।
चीफ़ एकज़ीकटीव ऑफीसर डाक्टर शेख़ शाकिर हुसैन (आई आर एस) ने आज स्टाफ़ रिपोर्टर सियासत से बातचीत के दौरान ये बात बताई। उन्हों ने बताया कि जो कुछ फ़ैसले किए गए हैं हज कमेटी के तवस्सुत से रवाना होने वाले आज़मीन की सहूलत और इंतेज़ामात को बेहतर बनाने की ग़रज़ से किए गए हैं।
हज 2013 के दरख़ास्त फॉर्म्स की इजराई का अमल फरवरी 2013 के वस्त में या इब्तेदा में होगा और दरख़ास्त के इदख़ाल की आख़िरी तारीख़ इब्तेदा से 45 यौम बाद की होगी।
डाक्टर शेख़ शाकिर हुसैन ने बताया कि हज 2013 के आज़मीन हज्ज को दरख़ास्त फ़ार्म के हमराह 300 रुये नाक़ाबिल वापसी अदा करने होंगे। जबके साबिक़ के आज़मीन 200 रुये बतौर नाक़ाबिल वापसी अदा किया करते थे।
इस में 100 रुपये का इज़ाफ़ा किया गया है। उन्हों ने मज़ीद बताया कि हज 2013 के मुंख़बा आज़मीन को बतौर पहली क़िस्त 76 हज़ार रुये अदा करनी होगी जबके साबिक़ में मुंख़बा आज़मीन से 51 हज़ार बतौर पहली क़िस्त वसूल की जाती थी। अलावा अज़ीं महफ़ूज़ ज़ुमरे के आज़मीन को जोके 70 साल से ज़ाइद उम्र के हैं या तीन साल से दरख़ास्त दाख़िल कररहे हैं और क़ुरआ में मुंतख़ब ना हुए हूँ इन्हें दरख़ास्त फ़ार्म के हमराह असल पासपोर्ट दाख़िल करना लाज़िमी होगा।
बगै़र असल पासपोर्ट के महफ़ूज़ ज़ुमरे के आज़मीन की दरख़ास्त क़बूल नहीं की जाएगी और उन्हें नए दरख़ास्त गुज़ारों में शुमार किया जाएगा। डाक्टर एस शाकिर हुसैन ने बताया कि हज 2012 में हज बैतुल्लाह की सआदत हासिल करने वाले रियासत आंध्र प्रदेश के हुज्जाज किराम से एर पोर्ट यूज़र डेवलपमंट फ़ीस की मुकम्मल रक़म वसूल की गई थी जिस में 50% रियायत का बाद में फ़ैसला किया गया था इसी लिए मर्कज़ी हज कमेटी ने यूज़र डेवलपमंट फ़ीस की निस्फ़ रक़म यानी 487 रुपये फ़ी हाजी रियास्ती हज कमेटी को वापिस करचुकी है और साथ में ये भी हिदायत दी गई है कि वो बज़रीया बैंक अपने हुज्जाज किराम को चेक्स रवाना करदें।
उन्हों ने बताया कि मर्कज़ी हज कमेटी ने इस बात का भी फ़ैसला किया है कि जिन रियास्तों में कोटा से कम दरख़ास्तें वसूल होती हैं इन रियास्तों के दरख़ास्त गुज़ारों के लिए दरख़ास्त के साथ असल पासपोर्ट दाख़िल करने का लज़ूम आइद किया जाये ताके लम्हा आख़िर तक इंतेज़ार किए बगै़र कोटा की तक़सीम को यक़ीनी बनाया जा सके।
उन्हों ने हज 2012 के इखतेताम को इतमीनान बख़श क़रार देते हुए कहा कि हज कमेटी मजमूई तौर पर हज 2012 से मुतमइन है लेकिन बाअज़ रियास्तों में कमेटीयों की कारकर्दगी को बेहतर-ओ-शफ़्फ़ाफ़ बनाने के इक़दामात किए जाऐंगे।
महफ़ूज़ ज़मुरा के आज़मीन के इंतेख़ाब में शफ़्फ़ाफ़ियत पैदा करने और साल पिछ्ले हुई बाअज़ रियास्तों की धांदलियों की कमेटी के सतह पर तहक़ीक़ात का भी इमकान है। डाक्टर शाकिर हुसैन ने बताया कि ख़ादिम अलहजाज के ज़मुरा में रियास्ती वक़्फ़ बोर्ड के मुलाज़मीन के लिए जो महफ़ूज़ ज़मुरा रखा गया था उसे भी बर्ख़ास्त करने का फ़ैसला किया गया है जिस का इतलाक़ मुलक भर की तमाम रियास्तों के वक़्फ़ बोर्ड मुलाज़मीन पर होगा।
हज 2013 में सिर्फ़ हज कमेटी के मुलाज़मीन ख़ादिम अलहजाज के महफ़ूज़ ज़ुमरे में रवाना होंगे और माबकी दीगर ख़ादिम अलहजाज का इंतेख़ाब बज़रीया इंटरव्यू क़ुरआ अमल में आएगा।