दुबई, 12 दिसंबर: ( पीटीआई ) हलाल अशिया के 2.77 टरेलेन (खरब) अमेरीकी डालर पर मुश्तमिल कारोबार में रवां साल 20 फ़ीसद इज़ाफ़ा हुआ है । हलाल ग़िज़ाई अशिया की आलमी सनअत अब हिंदूस्तान , अमेरीका और जुनूबी अफ्रीका के मार्केट्स में नए मौक़े तलाश कर रही है ।
आलमी हलाल सनअत की दुबई में मुनाक़िदा नुमाइश में हिंदूस्तान , कैनेडा , जर्मनी , हॉलैंड , जुनूबी अफ्रीका , स्पेन , बर्तानिया और अमेरीका के साथ साथ दुनिया भर के 26 से ज़ाइद ममालिक के 90 सनअती इदारे हिस्सा ले रहे हैं ।
यहां ये बात काबिल-ए-ज़िक्र है कि यहूदी भी हलाल ग़िज़ाई अशिया ही इस्तेमाल करते हैं और इसराईली ज़बान इब्रानी में हलाल के लिए लफ़्ज़ कौशर इस्तेमाल किया जाता है । हलाल या कौशर अशिया में ना सिर्फ़ ग़िज़ाई अशिया बल्कि तिब्बी ख़िदमात और यहां तक कि सिंगार (श्रृंगार) की अशिया जैसे लिपिस्टिक वगैरह का भी अहाता किया जाता है।
जिसमें सिर्फ़ ग़िज़ाई अशिया का सालाना कारोबार 20 फ़ीसद यानी 550 अरब अमेरीकी डालर पर मुश्तमिल है। शारजा चैंबर्स आफ़ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री के चेयरमैन सैफ मुहम्मद अल मदफ़ा ने कहा कि इस इलाक़ा में मयारी हलाल ग़िज़ाई अशिया की तलब में मुसलसल इज़ाफ़ा ने आलमी हलाल सनअत को ना सिर्फ़ एक नया मौक़ा फ़राहम किया है बल्कि एक अहम चैलेंज भी दिया है।
ख़लीजी अरब का इलाक़ा आलमी हलाल सनअत के लिए कलीदी अहमियत का हामिल है क्योंकि अपनी ग़िज़ाई ज़रूरियात का 80 ता 90 फ़ीसद मुख़्तलिफ़ बैरूनी ममालिक से दरआमद करता है । सैफ मुहम्मद अल मदफ़ा ने कहा कि मशरिक़ी वसती और चंद दीगर मुस्लिम अक्सरीयती ममालिक में ताज़ा गोश्त तलब से बहुत कम दस्तयाब होता है, चुनांचे इस सनअत को ताज़ा गोश्त की फ़राहमी के बेहतरीन मौक़े हैं।
छः ममालिक पर मुश्तमिल ख़लीजी तआवुन कौंसल तमाम दरआमद शूदा ग़िज़ाई अशिया पर हलाल की महर को लाज़िमी क़रार देने पर ग़ौर कर रही है ।