हिंदू, मुस्लिम को छोड़ लोग इंसानियत को बनाए धर्म और नेताओं को सिखाए सबक: कवि गोपालदास ‘नीरज’

मध्य प्रदेश: भोपाल में आयोजित तीन दिवसीय द ग्रेट इंडियन फिल्म एंड लिटरेचर फेस्टिवल में शिरकत करने आए पद्मभूषण गीतकार, कवि गोपालदास ‘नीरज’ ने देश में बढ़ रहे जातिवाद का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि जातिवाद इस भारत का सबसे बड़ा दुर्भाग्य रहा है। जातिवाद पर राजनीति कर रहे आजकल के नेता लोगों में आपसी मतभेद पैदा अपना मतलब दुरस्त करने में लगे हैं। यह बहुत अफ़सोस की बात है कि खुद कड़ी सुरक्षा में घूम रहे नेता आम जनता के पैरों के कांटे बो रही है।

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अफसोस है कि आज के राजनेता जाति की ही राजनीति कर रहे हैं। मेरा स्वास्थ्य इन दिनों ठीक नहीं है लेकिन मैं हाइकू लिख रहा हूं। नीरज का कहना है कि मैं धर्म के बारे में कुछ नहीं जानता मुझे बस इतना ही समझ में आता है कि मैं एक कवि हूँ जिसका धर्म इंसान बन कर लोगों तक इंसानियत पहुंचाना है। मैं अपने आप को न हिंदू मानता हूं, न मुसलमान, न कोई और धर्म में आस्था रखने वाला। मैं किसी धर्म में नहीं, धार्मिकता में यकीन करता हूँ क्योंकि धार्मिकता बड़ी चीज है। धर्म के नाम पर तो लोग तिलक भी लगाते हैं, अजान भी करते हैं लेकिन धार्मिकता बड़ी चीज है।