हिंद-ओ-पाक सहाफ़ी वीज़े की इजराई में फ़राख़दिली के ख़ाहां

मुंबई और कराँची प्रेस कलब से ताल्लुक़ ( संबंध) रखने वाले सहाफ़ीयों ने ख़ाहिश ज़ाहिर की है कि सहाफ़ी बिरादरी के लिए दोनों ममालिक ( देशों) के दौरे के लिए वीज़े की इजराई का आज़ादाना (आज़ादी के साथ) निज़ाम ( प्रबंध) होना चाहीए ताकि दोनों ममालिक ( देशों) से मुताल्लिक़ (संबंधित) मालूमात और ख़बरों के तबादले को यक़ीनी बनाया जा सके।

ये मुतालिबा दी रोल आफ़ मीडिया इन प्रोमोटिंग पेस इन दी सब कानटेनेन्ट के मौज़ू पर मुनाक़िदा एक सेमिनार में किया गया जिस में कराँची और हैदराबाद (सिंध) से 14 रुकनी सहाफ़ती वफ़द ने शिरकत की। पाकिस्तानी ज़राए इब्लाग़ की एक टीम कल ही एक हफ़्ता तवील ( लंबे) दौरा पर यहां पहुंची जब कि मुंबई प्रेस कलब का एक वफ़द गुज़श्ता साल नवंबर में कराँची और हैदराबाद (सिंध) का दौरा कर चुका है।

इस मौक़ा पर दी न्यूज़ के सीनीयर रिपोर्टर और कराँची प्रेस कलब के सदर ताहिर हुसैन ख़ान ने कहा कि दोनों ममालिक ( देशों) की हुकूमतों को सहाफ़ीयों के लिए कम अज़ ( से) कम एक साल के लिए वीज़े जारी करना चाहीए ताकि अंदरून एक साल दोनों ममालिक ( देशों)के सहाफ़ी जितनी बार चाहें, दौरा कर सकें।

इस मौक़ा पर मुंबई प्रेस कलब के जतिन देसाई ने कहा कि ज़रूरत इस बात की है कि सहाफ़ीयों पर दोनों ममालिक का दौरा करने की पाबंदी आइद ना की जाए ( पाबंदी ना लगायी जाए)। फ़िलहाल हिंद-ओ-पाक से सिर्फ दो, दो सहाफ़ीयों को ही दौरे की इजाज़त है। दी हिन्दू और पी टी आई से वाबस्ता ( संबद्व)सहाफ़ीयों को ईस्लामाबाद से अपनी कारकर्दगी ( काम को) अंजाम देने की इजाज़त मिलनी चाहीए।

यही नहीं बल्कि उन्हें रावलपिंडी जाने की भी इजाज़त मिलनी चाहीए। बिलकुल इसी तरह उसे पाकिस्तानी सहाफ़ी जो दिल्ली में मुक़ीम हैं, उन्हें नोएडा यह गड़गावँ का दौरा करने के लिए भी बड़ी मुश्किलात का सामना करना पड़ता है।