हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब प्रवर्तन निदेशालय को जांच के दौरान मिले ‘सबूत’ इशारा करते हैं कि आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक जायदाद इकट्ठा करने के मामले में इस कद्दावर कांग्रेस नेता ने अपने बचाव में ‘फर्जीवाड़े’ का सहारा लिया है।
ED इन सबूतों को ‘अकाट्य’ मानकर जांच आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों के खिलाफ हवाला आरोपों की जांच कर रही सरकारी एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों ने सोमवार को बताया कि उन्हें कई सबूत मिले हैं जिनसे यह साफ होता है कि वीरभद्र सिंह ने कथित तौर पर रेकॉर्ड के साथ छेड़खानी की, पिछली तारीखों के स्टैम्प पेपर हासिल किए और सेब कारोबारियों के साथ पुरानी तारीखों के अग्रीमेंट तैयार किए जिससे आमदनी में आए ‘बड़े उछाल’ को दिखाया जा सके।
वीरभद्र सिंह की आमदनी टैक्स छापों से पहले दिसबंर, 2011 में 47.35 लाख रुपये बताई गई थी जबकि जांच शुरू होने के बाद यह बढ़कर 6.57 करोड़ रुपये हो गई। ED सूत्रों का कहना है कि आमदनी के ज्ञात स्रोतों से अधिक जायदाद जमा करने के मामले में पहले से ही CBI जांच का सामना कर रहे वीरभद्र सिंह को हवाला लेनदेन के आरोपों के अलावा दस्तावेजों में छेड़छाड़ के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है।
You must be logged in to post a comment.