मुंबई, 12 दिसंबर: (एजेंसी) महाराष्ट्रा के गवर्नर के शंकर नारायण ने आज वालदैन और टीचर्स को बच्चों से मुताल्लिक़ मुफ़ीद मश्वरा देते हुए कहा कि उनके हाथों में बच्चों का मुस्तक़बिल होता है ।
वो अगर चाहें तो बच्चों के किरदार को मनफ़ी या मुसबत रूप दे सकते हैं । आजकल पाकेट मनी देने का रिवाज बहुत ज़्यादा है जिसकी वो मुख़ालिफ़त करते हैं । पाकेट मनी से आजकल बच्चे बिगड़ते जा रहे हैं । जब बच्चे दस रुपये तलब करें तो उन्हें सिर्फ़ दो रुपये दीजिए और बादअज़ां ये भी पूछिए कि वो दस रुपय कहाँ और कैसे ख़र्च हुए ।
राज भवन में चिल्ड्रंस कलब के ग्रुप से ख़िताब करते हुए उन्होंने ये बात कही । मज़कूरा कलब की ग़रीब और पसमांदा लेकिन लेकिन बासलाहीयत बच्चों का माली तआवुन करने 1951 में तशकील की गई थी ताकि पसमांदा और महरूम तबक़े से ताल्लुक़ रखने वाले बच्चे भी ज़िंदगी में ख़ुद कफ़ील बन सके ।