नई दिल्ली: देश में इस वक़्त समाज के पिछड़े तबक़ों में एक डर का माहौल है जिसकी वजह से सामाजिक व्यवस्था चिंताजनक हो गयी है. देश की चिंताजनक स्थिति और अल्पसंख्यकों, दलितों और कमजोर वर्गों को लगातार हिंसा का निशाना बनाए जाने की वजह से जो डर के हालात पैदा हुए हैं उसके विरुद्ध मुसलमानों के धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक दलों ने आज शुक्रवार 23 सितंबर को 3 बजे आरएसएस और भगवा संगठनों के खिलाफ एकजुट होकर जंतर मंतर पर एक जबरदस्त प्रदर्शन किया गया।
इस प्रदर्शन में हजारों आम लोगों ने भाग लिया।
देश की वर्तमान चिंताजनक स्थिति और विशेषकर अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा पर ज़बरदस्त ग़ुस्से का प्रदर्शन किया जिसमें जमाते इस्लामी, ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिसे मुशावरत, जमीयत उलेमा ए हिंद, ऑल इंडिया शिया परिषद, एसआईओएस, लोक समिति, आमोद, जमियत अहले हदीस, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के सभी प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
प्रदर्शन में पीड़ितों के पक्ष में खड़े होकर और उन्हें न्याय दिलाने तथा स्थिति को बदलने के लिए संगठनों ने नारे लगाए और सरकार की ‘आपराधिक’ चुप्पी और लापरवाही के ख़िलाफ़ अपने आक्रोश को व्यक्त किया और देश की जनता की राय को सहज किया जिस में सभी मुस्लिम तंजीमों ने भाग लिया।
सोचने और गौर करने वाली बात ये भी है कि इन सभी मुस्लिम संगठनों को ही एकजुट होने की नौबत क्यों आई। क्यों आजकल ऐसा माहौल बना हुआ है कि मुस्लिमों और दलितों को ही निशाना बनाया जा रहा है जबकि वह भी तब से ही देश के वासी है जब से बाकी धर्मों के लोग भारत में रह रहे हैं। आखिर इसकी वजह क्या है कि उनके ही देश में बैगानों जैसे सलूक किया जा रहा है, क्यों हो रही हैं ऊना, दादरी, बिजनौर और देश के कोनों- कोनों में।