बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन सजर्री (बीएएमएस) डिग्री घोटाले के तार नालंदा से जुड़ गये हैं। जुमा को गुजरात पुलिस ने बिहारशरीफ के एक वकील को इस मामले में गिरफ्तार किया। गुजरात पुलिस का दावा है कि इस धंधे में उसकी अहम किरदार है। उसके खिलाफ दो अहम सबूत मिले हैं। पहला, उसका मोबाइल नंबर, जिससे गुजरात में एक सख्श मुसलसल उसके राब्ते में रहा और दूसरा दूसरा सुबूत वह बैंक अकाउंट है, जिसमें रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया।
गुजरात पुलिस ने इस मामले में 2013 में गुजरात के बनासकांठी से गिरफ्तार किये गये सरस्वती चैरिटी ट्रस्ट के ऑपरेटर रमेश भाई दलशंग की निशानदेही पर यह कार्रवाई की। गुजरात पुलिस के साथ आये दलशंग ने सहाफ़ियों को बताया कि साल 2011 में गुजरात के एक अखबार में छपे एक इश्तेहार की बुनियाद पर मैंने नालंदा जिले के लहेरी थाना इलाक़े के बड़ी पहाड़ी के रहनेव वाले शैलेश कुमार से मोबाइल नंबर पर राब्ता किया, तब मुङो बताया गया कि महज तीन माह में आपको आयुर्वेदिक चिकित्सीय से मुतल्लिक़ डिग्री पोस्ट के जरिये से दस्तयाब करायी जा सकती है।
इसके एवज में आपको महज़ 49 हजार रुपये अदा करने होंगे। तय बात की बुनियाद पर मिस्टर कुमार की तरफ से बताये स्टेट बैंक के उसके अकाउंट में तीन किस्तों में रुपये भेज दिये गये। तीन माह के अंदर मेरे नाम से बीएएमएस की डिग्री डाक के जरिये से भेज दी गयी। उसी डिग्री की बुनियाद पर गुजरात में मैंने क्लिनिक खोल कर प्रैक्टिस कर रहा था।
गिरफ्तारी को लेकर नालंदा आयी गुजरात पुलिस की टीम में शामिल ट्रेनी सब इंस्पेक्टर एमएन देसाई ने बताया कि गुजरात पुलिस इस मामले में बड़ा खुलासा कर सकती है। ट्रेनी सब इंस्पेक्टर ने बताया कि गुजरात में जिस सख्श को गिरफ्तार किया गया है, उसके रिहाइशगाह से फर्जी आयुर्वेदिक डिग्री से मुतल्लिक़ कागजात बरामद किये गये हैं।
इस कारनामे की जानकारी गुजरात पुलिस को वहां के आला पुलिस अफसरों ने दी थी। इसके लिए गुजरात सेहत महकमा काफी कोशिश कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस तरह की फर्जी आयुर्वेदिक डिग्री और किन-किन लोगों के हाथों में बेची गयी। पुलिस की गिरफ्त में आये वकील ने सहाफ़ियों को बताया कि मुङो पर लगा इल्ज़ाम बेबुनियाद है। इस मामले मुङो कुछ भी नहीं जानकारी नहीं है।