नई दिल्ली, 12 दिसंबर: ( एजेंसी) प्रेस कौंसल आफ़ इंडिया के सदर नशीन रिटायर्ड जस्टिस मरकंडे काटजू ने आज वज़ाहत करते हुए कहा कि उन्होंने जो रिमार्क किया था कि 90 फ़ीसद हिंदूस्तानी बेवक़ूफ़ हैं इसका मतलब दरअसल अवाम को इन ज़मीनी हक़ायक़ के बारे में बेदार करना था जो आज के समाज का हिस्सा बन चुका है यानी ज़ात पात और फ़िर्कावारीयत ।
मेरे बयान को प्रेस रिपोर्टस में तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है अलबत्ता ये बात सही है कि मैंने 90 फ़ीसद ( तमाम नहीं ) हिंदूस्तानियों को बेवक़ूफ़ क़रार दिया था । उन्होंने कहा कि इस रिमार्क के ज़रीया इनका मक़सद किसी की दिला ज़ारी नहीं था बल्कि अवाम को ज़मीनी हक़ायक़ से आगाह करना था ।
ज़ात पात फ़िर्कावारीयत तो हम परस्ती ये सब ऐसी बातें हैं जिस ने लोगों के ज़हनों पर क़बज़ा कर रखा है और जिसकी वजह से तरक़्क़ी की रफ़्तार इंतिहाई धीमी हो चुकी है । ये बात मिस्टर काटजू ने तानीया और आदित्य नामी दो तलबा को रवाना करदा ई मेल में कही ।
इन तलबा ने मिस्टर काटजू के बयान के ख़िलाफ़ उन्हें एक क़ानूनी नोटिस रवाना की थी । काटजू ने वज़ाहत करते हुए कहा कि उन्होंने 90 के जिस अदद का इस्तेमाल किया है उसे रियाज़ी के नुक़्ता-ए-नज़र से ना देखा जाए बल्कि उन्होंने इस तनाज़ुर में इसका इस्तेमाल किया था कि हिंदूस्तानियों की अक्सरीयत (एक बार फिर कहूंगा कि तमाम हिंदूस्तानी नहीं ) बेवक़ूफ़ है ।
उन्होंने दोनों तलबा से कहा कि उनके बयान में उन्होंने दोनों में से किसी का भी नाम नहीं लिया ना ही किसी फ़िरक़े का नाम लिया और ना ही किसी मसलक का। मैंने ये नहीं कहा कि तुम दोनों भी बेवक़ूफ़ों के ज़ुमरे में शामिल हो । लखनऊ के तलबा तानीया ठाकुर और आदित्य ठाकुर ने काटजू को नोटिस रवाना करते हुए उन से अपने बयान पर माज़रत ख़्वाही का मुतालिबा किया ।
उन्होंने इंतिबाह ( Warning) भी दिया कि अगर अंदरून 30 यौम काटजू ने माज़रत ख़्वाही नहीं की तो उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी । तानीया और आदित्य ने कहा कि वो हिंदूस्तान के एक औसत दर्जा के शहरी हैं और औसत दर्जा के शहरी होने के नाते उन्हें काटजू के बयान से शदीद सदमा हुआ।