मुस्लिम समुदाय के लोगो को देश में शिक्षा के मामले में पिछड़े खंडो में से एक माना जाता है और लगातार इस समुदाय को लोगो को शिक्षा देने के लिए प्रेरित किया जाता रहा है। हालांकि अब एक ऐसी खबर सामने आई जो शायद आपको हैरान कर दें और आपको यह अविश्वसनीय लग सकता है।
दरअसल वेबसाइट ‘मुस्लिम मिरर’ में छपी खबर के अनुसार पश्चिम बंगाल जिसकी मुस्लिम की मुस्लिम जनसंख्या को उत्तर प्रदेश की मुस्लिम जनसंख्या के बाद सबसे पिछड़ी मुस्लिम आबादी माना जाता है। बावजूद इसके पश्चिम बंगाल में एक मुस्लिम एनजीओ अल-अमीन मिशन ने मुस्लिमो को देश की बड़ी परीक्षाए की तैय्यारी करवाकर हज़ारो की संख्या में मुस्लिम छात्रों को आगे बढ़ाया है।
रिपोर्ट के अनुसार इस मुस्लिम एनजीओ ने अब तक 2500 डॉक्टर, 4000 इंजीनियरों और 65 सिविल सरवेंट्स जा उत्पादन किया है। यही नहीं इस एनजीओ ने अपनी टोपी में एक और पंख जोड़ते हुए इस वर्ष के ‘नीट’ में अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल की। अल-अमीन मिशन के 370 छात्रों ने ‘नीट’ परीक्षा क्रैक कर ली। जिसमे 319 ने सरकारी कॉलेजों में एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त किया जबकि 51 को पश्चिम बंगाल के निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्राप्त किया।
अब आप सोच रहे होंगे कि इस अविश्वसनीय कारनामे के पीछे आखिर कौन है और इसके पीछे असली कारण क्या है? तो आपको बता दें कि इस उपलब्धियों के पीछे जो व्यक्ति है उनका नाम एम नुरुल इस्लाम है जिनके प्रयासों के कारण ही पिछले तीन दशकों से एनजीओ शानदार परिणाम प्रदान कर रहा है।
अपनी सफलता का राज़ बताते हुए उन्होंने ‘मुस्लिम मिरर’ से कहा कि वह कोलकाता में अपने कॉलेज के दिनों के दौरान रामकृष्ण मिशन से प्रेरित हुए थे। उत्तर प्रदेश के बाद पश्चिम बंगाल में मुस्लिम शिक्षा के मामले में पीछे थे। उन्होंने ‘नीट’ क्रेक करने वाले छात्रों के बारे में बताया कि 370 ‘नीट’ क्रैकर्स में से 289 को एमबीबीएस और 81 को बीडीएस पाठ्यक्रम प्रवेश मिला इसमें 282 लड़के और 88 लड़कियां शामिल थी।
बता दें कि वर्ष एम नुरुल हसन ने वर्ष 1986 में कोलकाता से 70 किलोमीटर दूर हावड़ा जिले के अपने मूल गांव खलतपुर में मदरसा भवन के अन्दर 11 छात्रों के साथ अपना संस्थान शुरू किया था।
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