असम में एनआरसी का अंतिम मसौदा आज, भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात

असम में एनआरसी का अंतिम मसौदा आज, भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात

असम में वैध नागरिकों की पहचान के लिए नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) के अपडेट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सोमवार को इसका अंतिम मसौदा प्रकाशित किया जाएगा। इसे लेकर राज्य के अल्पसंख्यकों में भय और असमंजस का माहौल है। वहीं असम की सीमा से लगे चार राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय और मणिपुर) ने घुसपैठ की आशंका के मद्देनजर सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है।

सीमावर्ती चार राज्यों ने घुसपैठ की आशंका के चलते बढ़ाई सुरक्षा 

लगभग तीन साल से एनआरसी को अपडेट करने की प्रक्रिया जारी थी। पहले इसका प्रकाशन 30 जून को होना था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में प्राकृतिक आपदा को ध्यान में रखते हुए इसकी समयसीमा एक महीने बढ़ा दी थी। एनआरसी के राज्य समन्वयक प्रतीक हलेजा ने बताया कि मसौदा राज्य के सभी एनआरसी सेवा केंद्रों पर दोपहर में प्रकाशित कर दिया जाएगा। आवेदक सूची में अपना नाम, पता और फोटो देख सकते हैं।

वहीं राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने भरोसा दिया है कि वैध रूप से भारत में आने वाले लोगों को कोई दिक्कत नहीं होगी और उन्हें बाद में विदेशी न्यायाधिकरण के समक्ष अपनी नागरिकता साबित करने का मौका मिलेगा। केंद्रीय गृहमंत्री ने साफ किया है कि 30 जुलाई को महज मसविदा प्रकाशित होगा। बाद के दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम एनआरसी का प्रकाशन होगा। फिर भी अल्पसंख्यकों का भय खत्म नहीं हो रहा है।

अर्धसैनिक बलों की 220 कंपनियां भेजी 

असम में कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार ने भी असम और आसपास के राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों की 220 कंपनियां भेजी हैं। घुसपैठ रोकने के लिए सीमाओं पर केंद्रीय बलों के अलावा इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की जा रही हैं।

क्या है एनआरसी?

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) में जिनके नाम नहीं होंगे उन्हें अवैध नागरिक माना जाएगा। इसमें उन भारतीय नागरिकों के नामों को शामिल किया जा रहा है जो 25 मार्च 1971 से पहले असम में रह रहे हैं। उसके बाद राज्य में पहुंचने वालों को बांग्लादेश वापस भेज दिया जाएगा।

मुस्लिम संगठन कर रहे विरोध

कई राजनीतिक दल और मुस्लिम संगठन एनआरसी का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार अल्पसंख्यकों को बाहर निकालने के लिए इसका सहारा ले रही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उसकी निगरानी में एनआरसी को अपडेट किया जा रहा है। इससे पहले 31 दिसंबर 2017 को जारी पहली सूची में 3.29 करोड़ आवेदकों में 1.9 करोड़ लोगों के नाम ही शामिल थे।

नगालैंड भी एनआरसी अपडेट करने का कर रहा विचार

असम के बाद अब एक अन्य पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड भी एनआरसी को अपडेट करने पर विचार कर रहा है। हालांकि पहले वह असम में चल रही पूरी प्रक्रिया का अवलोकन कर लेना चाहता है। दूसरी ओर, नगा छात्र संघ (एनएसएफ) ने भी 31 जुलाई से बाहरी लोगों के कागजात की जांच का एलान किया है।

मेघालय ने बढ़ाई निगरानी

मेघालय ने भी असम से लगी सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है। खासी छात्र संघ (केएसयू) ने राज्य की साझा सरकार को ठोस घुसपैठ रोधी कदम उठाने को कहा है। केएसयू का कहना है कि वर्ष 1971 के बाद असम में बांग्लादेशियों की घुसपैठ के कारण असमिया, बोड़ो और राभा जैसी जनजातियां अपने घर में ही बेगानी हो गई हैं।

सीएम पेमा खांडू ने कड़ी जांच के निर्देश दिए

मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में भाजपा की अगुवाई वाली सरकारों ने भी असम से अवैध नागरिक करार दिए जाने वालों की घुसपैठ की आशंका के मद्देनजर सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी है। मणिपुर ने असम की बराक घाटी से लगे जिरीबाम इलाके में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की हैं। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भी सीमा पर आवाजाही करने वालों की कड़ी जांच करने के निर्देश दिए हैं।

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