सरकार के ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाने के बाद बांग्लादेश के पहले हिंदू चीफ़ जस्टिस की बढ़ी मुश्किलें

सरकार के ख़िलाफ एक ऐतिहासिक फ़ैसला देने के बाद बांग्लादेश के पहले हिंदू मुख्य न्यायाधीश एक महीने की छुट्टी पर हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्हें फोर्स लीव या छुट्टी पर जाने के लिए मजबूर किया गया है।

बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रमुख ज़ैनुल आबेदिन ने दावा किया कि जस्टिस सिन्हा को छुट्टी पर जाने के लिए मजबूर किया गया है।

हालांकि, क़ानून मंत्री अनिसुल हक़ ने इन आरोपों को ग़लत बताया है। उन्होंने कहा कि जस्टिस सिन्हा बीमारी की वजह से छुट्टी पर गए हैं। उनकी गैरमौजूदगी का 16वें संविधान संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कोई संबंध नहीं है।

क्या है मामला

दरउसल, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 16वें संविधान संशोधन के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट के जजों को पद से हटाने का अधिकार संसद को दिया था। लेकिन इसी साल अगस्त महीने में जस्टिस सिन्हा के नेतृत्व वाले बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट ने 16वें संविधान संशोधन को असंवैधानिक करार दे दिया।

जस्टिस सिन्हा ने उस प्रावधान को फिर से बहाल कर दिया जिसके तहत चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ही न्यायिक आचार संहिता भंग करने पर किसी जज को पद से हटा सकती है।

जस्टिस सिन्हा के इस फ़ैसले की खूब तारीफ हुई। इस फैसले को मुस्लिम बहुमत वाले एक देश में धर्मनिरपेक्ष न्यायपालिका की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया गया।

कौन है जस्टिस सुरेंद्र कुमार सिन्हा

जस्टिस सुरेंद्र कुमार सिन्हा बांग्लादेश के पहले हिंदू मुख्य न्यायाधीश हैं। उन्होंने 17 जनवरी, 2015 को बांग्लादेश के चीफ़ जस्टिस का कार्यकाल संभाला था। एक फरवरी 1951 को जन्मे एसके सिन्हा ने क़ानून की डिग्री हासिल करने के बाद 1974 में अधिवक्ता के तौर पर ज़िला न्यायालय में वकालत शुरू की।

1978 में उन्होंने हाई कोर्ट में और 1990 में बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के अपीलीय डिविज़न में वकालत शुरू की। इस दौरान उन्होंने जाने माने वकील एसआर पाल के जूनियर के रूप में 1999 तक अपनी सेवा दी। 24 अक्तूबर 1999 में उन्हें हाई कोर्ट के जज और 16 जुलाई 2009 को सुप्रीम कोर्ट के अपीलीय डिविज़न के जज के रूप में नियुक्त किया गया।