इक़बाल रज़ा का ब्लॉग: ‘खाड़ी देशों में आर्थिक विकास का भविष्य’

इक़बाल रज़ा का ब्लॉग: ‘खाड़ी देशों में आर्थिक विकास का भविष्य’

इक़बाल रज़ा, कोलकाता। आर्थिक गतिविधि किसी भी अर्थव्यवस्था के विकास का प्राथमिक इंजन होता है। खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था 2018 की तुलना में 2019 में कुछ सुधार देखा गया है और 2020-21 में और गति पकड़ने के आसार हैं। OPEC देशों के पास दुनिया के तेल भंडार का 81.5% रिज़र्व है और उत्पादन में क़रीब-क़रीब 44% का योगदान है जो आपसी समन्वय से मूल्य निर्धारण भी करते हैं। तेल की कीमतों में लगातार गिरावट के कारण, वित्तीय संकट से बचने के लिए इन्हे वित्तीय सुधार व आर्थिक विविधीकरण का रुख करना पड़ा।

अल्जीरिया-सूडान संकट, लीबिया, सीरिया और यमन में संघर्ष आर्थिक गतिविधि को प्रभावित कर रहे हैं जिससे आने वाले समय में तेल की कीमत में अस्थिरता और क्षेत्रीय अनिश्चितता की संभावना है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक व्यापार में तनाव जैसे America vs China, ईरान के तेल निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंध और OPEC व अन्य तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन में कटौती से कीमतों में Volatility देखी जा रही है जो अभी $70 प्रति बैरल के आस-पास है।

IMF – ग्लोबल ग्रोथ को 0.2% डाउनग्रेड करते हुए विश्व अर्थव्यवस्था के धीमे होने के संकेत दिए हैं वहीँ अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी Moody’s द्वारा सऊदी अरब को HIGH(+) स्कोर दिया गया।

सऊदी अरब जो दुनिया की शीर्ष तेल निर्यातक और अरब क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, का सकल घरेलू उत्पाद 2018 व 2019 में क्रमशः 2.21% व 1.8% था, 2020 में 2.2% वृद्धि होने का अनुमान है। क्षेत्र की सबसे अधिक विविधता वाली अर्थव्यवस्था UAE के विकास में 0.1% की हलकी गिरावट देखी गयी थी लेकिन उम्मीद है ‘दुबई एक्सपो 2020’ व UAE Vision 2021 और सरकार द्वारा खर्च में बढ़ोतरी से इसमें तेजी आने की संभावना है। बहरीन और ओमान के अर्थव्यवस्था की गति सुस्त चल रही थी पर आगे इसमें भी सुधार का अनुमान है।

Middle East की पिछले कुछ वर्षों की आर्थिक गतिविधि व आने वाले वर्षों में आर्थिक सपनों को लक्ष्य में रखकर तैयार किये गए योजनाओं जैसे Saudi Vision 2030, Dubai Expo 2020, UAE Vision 2021, Kuwait Vision 2035 तथा Oman Vision 2040 आदि को देखते हुए तथा वित्तीय विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, यह कहा जा सकता है कि बोल्ड राजकोषीय समर्थन, समायोजित मौद्रिक नीति व तेल की कीमतों में वृद्धि के अनुमान के कारण मध्य-पूर्व क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में तेज़ी के आसार हैं और फ़िलहाल Outlook Positive रहने की संभावना है।

Top Stories