नई दिल्ली। कैटल मार्केट्स में गायों, भैंसों, बैलों और ऊंटों को वध करने के लिए खरीदे या बेचे जाने पर लगी रोक हट सकती है। पिछले साल जुलाई में सरकार ने इस बाबत रोक लगा दी थी। उसने अब एक मसौदे के जरिए पशुओं के प्रति क्रूरता रोकने के लिए कई उपाय किए गए हैं और संबद्ध पक्षों से इस पर राय मांगी है। इसमें पशुओं की वध के लिए बिक्री पर रोक लगाने का जिक्र नहीं है।
सरकार ने पहले यह व्यवस्था की थी कि मवेशियों को पशु बाजार में उन्हीं लोगों को बेचा जा सकेगा जो अंडरटेकिंग देंगे कि वह मवेशी को कृषि संबंधी कार्य के लिए खरीद रहे हैं। इसके लिए उन्हें अपने कृषि राजस्व संबंधी दस्तावेज दिखाने होते थे, ताकि साबित हो सके कि वह किसान हैं।
मवेशी को खरीदने के लिए उन्हें फोटो आईडी और एड्रेस प्रूफ भी देना होता था। सरकार ने इसके लिए 1960 के पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम के तहत इन्हें नोटिफिकेशन जारी किया था। ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनाए गए थे। सरकार के इस इंतजाम के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया था और देश भर में इसका काफी विरोध हुआ था।
पशुओं के प्रति क्रूरता रोकने के नए मसौदे में पशु बाजारों में मवेशियों को वध के लिए बेचने पर रोक का प्रावधान नहीं हैं। इसमें कहा गया है कि पशु बाजारों में बीमार, प्रेग्नेंट और छोटे मवेशियों, जैसे बछिया या बछड़े को नहीं बेचा जा सकेगा।
इसके मुताबिक, कैटल मार्केट के कामकाज पर नजर रखने के लिए राज्य और जिला स्तर पर समितियां बनाने का भी प्रावधान किया गया है। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर होने वाली मवेशियों की तस्करी को रोकने के लिए भी सरकार ने इंतजाम किया है। किसी भी पशु के सींगों और किसी भी अंग को रंगा नहीं जा सकेगा। उन्हें दागा नहीं जा सकेगा।