केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसने एनआरआई को मताधिकार की इजाज़त देने के लिए कानून में संशोधन करने का फ़ैसला किया है।
मंत्रियों की एक समूह ने यहाँ 20 जुलाई को मुलाकात की और फैसला किया कि इस के लिए पीपल एक्ट में संशोधन करने की ज़रूरत है। अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की एक बेंच से पहले पेपर सबमिट किया।
उन्होंने बताया कि एनआरआई को चुनावों में वोट देने की इजाज़त के लिए आरपीसी अधिनियम की धारा 20 (ए) को संशोधित करने की जरूरत है। अदालत ने वेणुगोपाल द्वारा किए गए अनुरोध पर दो सप्ताह के बाद गौर करने का बताया है।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को चुनाव के दौरान प्रॉक्सी और ई-बैलट के माध्यम से एनआरआई के मतदान के अधिकार नियमों में संशोधन करने की विफलता पर सरकार की खिंचाई की थी। यह कहा था कि यह मामला सरकार के विवाद पर 2014 से लंबित रखा गया है।