आज के तानाशाही दौर में संसद खामोश है, लेकिन विश्वविद्यालय बोल रहे हैं: दिलीप मंडल

आज के तानाशाही दौर में संसद खामोश है, लेकिन विश्वविद्यालय बोल रहे हैं: दिलीप मंडल

जब संसद खामोश है, तब विश्वविद्यालय बोल रहे हैं। भारत में इस समय असली प्रतिपक्ष कॉलेज और यूनिवर्सिटी में नजर आया। नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने और तानाशाही राज स्थापित करने के दौर में उन्हें सबसे ज्यादा विरोध का सामना विश्वविद्यालयों में झेलना पड़ा।

पहली बार लखनऊ में बाबा साहेब आंबेडकर विश्वविद्यालय के छात्रों ने मोदी के मुंह पर कहा- नरेंद्र मोदी मुर्दाबाद! नरेंद्र मोदी रोहित वेमुला का हत्यारा है। हर विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलित हैं। वे गिरफ्तार हो रहे हैं। वे पिट रहे हैं। लेकिन वे फिर सड़कों पर आ जाते हैं। छात्र आज देश के सबसे परेशान लोगों में हैं।

सरकारी नौकरियां खत्म हो गई हैं। निजीकरण जारी है। प्राइवेट सेक्टर में मंदी है। छंटनियां हो रही हैं। नरेंद्र मोदी रोजगार मांगने वालों को दलाल कह रहे हैं।

सरकार कॉरपोरेट का साल में 83,000 करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर रही है, लेकिन किसी स्टूडेंट का एक रुपया एजुकेशन लोन भी माफ करने को वह राजी नहीं है। कर्ज लेकर पढ़ने के बाद नौकरी न पाने वाले छात्र की व्यथा समझने को सरकार तैयार नहीं है।

यूनिवर्सिटी में सीटों में कटौती की जा रही है। फेलोशिप बंद हो रही है। नेट के मौके कम हो गए हैं। देश में शिक्षकों के पांच लाख पद खाली हैं। एडहॉक और गेस्ट टीचर से शिक्षा व्यवस्था चलाई जा रही है।शिक्षा क्षेत्र त्रासदियों की अंतहीन दास्तान बन चुका है।

लेकिन ऐसे समय में कैंपस खौलने लगे हैं। जेपी आंदोलन के जैसा माहौल बनने लगा है। ऐसे ही आंदोलन की एक जोरदार आवाज कल रविवार को जंतर मंतर दिल्ली में।

  • दिलीप मंडल 

 

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