एक और निर्भया कांड, पुलिस ने नहीं सुनी फरियाद तो गैंगरेप पीड़ित ने लगाई फांसी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था बेहतर करने के नाम पर योगी सरकार खूब हाथ पैर मार रही है। बुधवार को योगी सरकार ने बड़ी तादात में अफसरों का फेरबदल किया लेकिन पुलिस व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। इलाहाबाद में जहां एक परिवार में गैंगरेप की घटना हुई तो उसी के परिवार के चार सदस्यों की निर्मम हत्या हो गई। इस घटनाक्रम में पुलिस मुकदर्शक की भूमिका में नज़र आई। प्रदेश में गैंगरेप की वारदात दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है। अभी 24 अप्रेल का एक ताज़ा मामला बहराईच से सामने आया है जहां 22 साल की एक युवती ब्यूटी पार्लर से अपने घर आ रही थी तभी एक कार सवार 6 बदमाशों ने बंदूक की नोक पर उसका अपहरण कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने मौजूद लोगों ने जब युवती के परिवार वालों को इसकी सूचना दी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। किसी तरह से युवती को परिजनों ने बदमाशों के चंगुल से छुड़वाया तब तक युवती के साथ गैंगरेप हो चुका था जब युवती ने इसकी एफआईआर दर्ज कराने पुलिस के यहां गई तो पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं किया और युवती को वापस घर आना पड़ा। इन सबसे हताश युवती ने बुधवार देर रात्रि फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली।

अमर उजाला पोर्टल की खबर के मुताबिक लड़की ने जब थाने में गैंगरेप की शिकायत लेकर गई तो पुलिस ने सुलहनामें पर दस्तखत करवा लिया जिसके बाद युवती हताश हो गई और इतना बड़ा कदम उठा लिया। पुलिस की कार्यप्रणाली बेहद हाशिए पर नज़र आती है। पुलिस का ये बर्ताव दिल्ली में निर्भया के साथ हुए गैंगरेप की याद ताज़ा करती है। आज बलात्कार के मामले में सख्त कानून भी है लेकिन पुलिस खुद अपनी वर्दी पर दाग लगाने पर तुली है। इस घटना में पुलिस की भूमिका चाहे जैसी हो लेकिन पुलिस की कार्यप्रणाली शक के घेरे में है।