यूपी महागबंधन में कांग्रेस शामिल होती तो नतीजा कुछ और ही होता!

यूपी महागबंधन में कांग्रेस शामिल होती तो नतीजा कुछ और ही होता!

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को सपा-बसपा-रालोद गठबंधन में शामिल नहीं करने का बहुत बड़ा खामियाजा इन दलों ने उठाया है। कांग्रेस ने एक दर्जन से अधिक सीटों पर गठबंधन की हार में भूमिका निभाई है। कांग्रेस भी गठबंधन में शामिल होती तो ये चारों पार्टियां मिलकर 32 सीटें जीत सकती थीं।

अमर उजाला पर छपी खबर के अनुसार, सुल्तानपुर में मेनका गांधी ने 44.85% वोट पाकर बसपा के सोनू सिंह को 1.34% वोटों के अंतर से हराया। जबकि कांग्रेस के संजय सिंह को 4.16% वोट मिले जो भाजपा के जीत के अंतर से ज्यादा हैं।

इसी तरह धौरहरा में कांग्रेस के जितिन प्रसाद को 1.61 लाख वोट मिले। वे तीसरे स्थान पर रहे लेकिन उनके वोटों ने बसपा के अरशद सिद्दीकी की 1.5 लाख वोटों से हार तय कर दी। यहां से भाजपा की रेखा वर्मा 5.09 लाख वोट पाकर जीतीं।

यही कहानी बदायूं, बलिया, बांदा, बाराबंकी, बस्ती, भदोही, चंदौली, संत कबीरनगर, प्रतापगढ, मेरठ और कौशांबी जैसी सीटें हैं जहां भाजपा की जीत का अंतर कांग्रेस उम्मीदवारों को मिले वोट से कम था।

फ़िरोज़ाबाद में शिवपाल सिंह ने चचेरे भाई राम गोपाल यादव के बेटे अक्षय की हार सुनिश्चित कर दी। अक्षय को भाजपा के हाथों करीब तीस हजार वोटों से शिकस्त मिली जबकि शिवपाल ने 91 हजार वोट हथियाए।

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