कश्मीर की 17 साल की ज़ूफा इकबाल ने ‘नमदा रोलिंग मशीन’ बनाकर सफलता की नई दास्ताँ लिखी है।
ज़ूफा इकबाल बताती हैं कि ‘जब मैं श्रीनगर के प्रजेंटेशन कॉन्वेंट स्कूल में थी तो एक कार्यक्रम के संबंध में मुझे एक प्रोजेक्ट बनाना था। हम लोग कश्मीर विश्वविद्यालय गए तो उन्होंने कहा कि आप कोई ऐसी एसी चीज़ बनाएं जिससे लोगों को भी फायदा हो।
इसके बाद मैं टीवी पर नमदों की उद्योग से जुड़े एक डोक्युमेंट्री देखी। इस तरह मैंने नमदा मशीन पर काम करना शुरू किया।
ज़ूफा कहती हैं कि जब उन्होंने इस परियोजना पर काम करना शुरू किया तो उन्हें पता नहीं था कि यह कैसे पूरा किया जाएगा। हाथ से बनाए जाने वाले नमदा में करीब पांच घंटे का समय लगता है।
लेकिन ज़ुफ़ा का दावा है कि जो मशीन उन्होंने बनाया है इससे काफी कम समय में नमदा बनाया जा सकता है।
इस नमदा रोलिंग मशीन में मोटर लगी होती है जिससे बिजली चलती है। नमदे का कच्चा माल तैयार करके इस रोलिंग मशीन में डाल दिया जाता है, फिर तैयार नमदा मशीन से बाहर आता है।
जूफ़ा ने बताया ‘ऐसा मेरे साथ कई बार हुआ जब लोगों ने मुझसे कहा कि पता नहीं तुम किस ख़याली दुनिया में रहती हो। ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। लेकिन मेरा बचपन से सपना था कि मैं कुछ ऐसा करूं कि एक दिन सभी मुझे अखबारों और टीवी पर देखें और मैंने अब ऐसा कर दिखाया है।
ज़ुफा को इस उपलब्धि पर कई पुरस्कार भी मिले हैं। इनमें वर्ष 2016 में मिलने वाला एपीजे अब्दुल कलाम पुरस्कार भी शामिल है।
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