नीतीश सरकार की शराबबंदी बन सकता है टीबी मरीजों की आफत

नीतीश सरकार की शराबबंदी बन सकता है टीबी मरीजों की आफत

बिहार : पिछले वर्ष बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार राज्य में शराब को बैन कर दिया था। इस बैन के करीब डेढ़ साल बाद अब यहां पर शराब की कमी से एक नई परेशानी पैदा हो गई है। बिहार में टीबी जैसी खतरनाक बीमारी के टेस्ट के लिए जो जरूरी चीजें चाहिए होती हैं, शराब बंदी की वजह से उन चीजों की कमी हो गई है।

शराब बंदी के कानून की वजह से टीबी टेस्ट के लिए बनी लैब्स में मिथेलिएटेड स्प्रीट और एथेनॉल जैसी चीजें भी नहीं मिल पा रही हैं।

लैब्स को फरवरी माह में बताया गया था कि जब तक कोई और विकल्प नहीं मिल जाता है उन्हें इंजेक्टा का प्रयोग करना है। इंजेक्टा एक तरह का मिथेलिएटेड स्प्रीट होता है। अधिकारियों ने माना है कि इंजेक्टा से आने वाले आंकड़ों में करीब 40 प्रतिशत आंकड़ें गलत होते हैं।

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब इस मामले को संज्ञान में लिया है। बिहार में इस समय 732 चिन्हित माइक्रोस्कोपी लैब्स और 60 माइक्रोस्कोपी लैब्स हैं जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसके अलावा पटना में टीबी के टेस्ट के लिए एक रेफ्रेंस लाइब्रेरी है।

शराब बंदी के बाद टीबी टेस्ट की संख्या में कोई कमी नहीं आई है, फिर भी राज्य के इस बीमारी की पड़ताल करने वाले सभी अधिकारियों ने अलर्ट जारी कर दिया है। बिहार में साल 2016 में टीबी के 64,178 केस सामने आए थे। वर्ष 2013 में 64,937 और वर्ष 2014 तक इसके 68, 145 मामले दर्ज हुए थे। सबसे ज्यादा केस मुजफ्फरनगर, गया, पटना, दरभंगा और सारण जिले में दर्ज हुए थे।

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