सुधारों के मद्देनजर चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था, आयोग ने कहा था कि चुनाव सुधारों के मद्देनजर ऐसे लोगों के लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया जाय जिसमे किसी भी नेता पर बिल बकाया हो ।जैसे सरकारी भवनों का किराया, बिजली या टेलीफोन बिल नहीं चुकाया हो ।
मोदी सरकार ने इस प्रस्ताव को यह कह कर ख़ारिज कर दिया की बिल भुगतान विवाद की स्थिति में बेवजह कानूनी पेंच फंसेंगे और विवाद लंबा खिंचकर अदालतों तक पहुंचेंगे। आयोग ने केंद्रीय कानून मंत्रालय को इस बारे में लिखकर चुनाव कानूनों में संशोधन करने को कहा था लेकिन मंत्रालय ने इनकार कर दिया है।